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लेख/सम सामयिकी

लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वासः लोकतंत्र की कठिन अग्निपरीक्षा

लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर और चिंताजनक संकेत है। लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि संवाद सहमति असहमति के सम्मान और संस्थागत विश्वास पर टिकी हुई एक सशक्त परंपरा है। संसद इस…
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ऑनलाइन गेमिंग की लत और आभासी दुनिया का बढ़ता खतरा

ऑनलाइन गेमिंग और आभासी दुनिया आज बच्चों और किशोरों के जीवन में तेजी से अपनी जगह बना रही है। तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है वहीं इसका असंतुलित और अनियंत्रित उपयोग एक गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में सामने आ रहा है। हाल में गाजियाबाद और…
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सोशल मीडिया: संवाद का सशक्त माध्यम या निजता पर मंडराता खतरा

आज का युग संचार क्रांति का युग है। तकनीक ने मानव जीवन को तेज सरल और व्यापक बनाया है। सोशल मीडिया और एआई के माध्यम से संवाद अब सीमाओं से परे पहुंच चुका है। विचारों का आदान प्रदान कुछ ही क्षणों में विश्व स्तर पर संभव हो गया है। लेकिन इसी तेज…
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Budget 2026: चुनाव से परे नई चुनौतियों का बजट

अक्सर केंद्र की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि वह चुनाव देखकर बजट बनाती है। मगर वर्ष 2026-27 के बजट में चुनावी घोषणाएं नहीं हैं। वर्ष 2014 से सत्ता में आई भाजपा आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाती…
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बजट से पहले मध्यम वर्ग की नई उम्मीदें, टैक्स और मेडिकल सुविधाओं में राहत की मांग

हर साल बजट से पहले देश का मध्यम वर्ग सरकार से कुछ नई राहतों की उम्मीद करता है। पिछले कुछ वर्षों में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपये किए जाने से मध्यवर्ग को बड़ी राहत मिली थी। कभी 5 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किए जाने पर जिस तरह लोगों…
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विमान हादसों में नेताओं की असमय विदाई : संयोग, चयन-पूर्वाग्रह या व्यवस्था की गहरी कमजोरी?

भारत की राजनीतिक यात्रा बार-बार आकाशी हादसों की भेंट चढ़ती रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान दुर्घटना ने एक बार फिर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। पांच लोगों की मौत के साथ राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ,…
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रिश्तों का मौन संकट: ‘वाइफ स्वैपिंग’ और टूटते सामाजिक मूल्य

कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिन पर लिखना केवल शब्दों का अभ्यास नहीं होता, बल्कि सामाजिक, मानसिक और नैतिक साहस की परीक्षा भी होता है। यह विषय भी उन्हीं में से एक है। यहाँ चुनौती सिर्फ़ अभिव्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सच को सामने लाने की है, जिसे…
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अमेरिका में राष्ट्रपति बदलते हैं, पर सिस्टम नहीं

अमेरिका स्वयं को लोकतंत्र, मानवाधिकार और सार्वभौमिक स्वाधीनता का सबसे बड़ा अभिरक्षक मानता है। लेकिन इतिहास बार-बार साबित करता है कि व्हाइट हाउस में चेहरे बदलते हैं, मान्यताओं की शब्दावली बदलती है, पर अमेरिकी सत्ता तंत्र की मूल प्रवृत्ति…
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आस्था, प्रभाव और सत्ता: सतुआ बाबा के उभार ने क्यों खड़े किए बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक फिज़ा में इन दिनों एक नाम लगातार गूंज रहा है—सतुआ बाबा। पूर्वांचल से उभरे इस युवा संत की लोकप्रियता अब केवल धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं रही, बल्कि सत्ता के शीर्ष तक पहुंचकर चर्चाओं का विषय बन चुकी है।…
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हिंसा से जल रहा बांग्लादेश

बंग्लादेश आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ राजनीतिक अस्थिरता सामाजिक तानेबाने को जलाकर राख कर रही है। ढाका की सड़कों से उठती आग की लपटें केवल एक शहर या एक देश तक सीमित नहीं दिखतीं बल्कि उनका धुआँ पूरे दक्षिण एशिया की हवा को भारी कर रहा है।…
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