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लेख/सम सामयिकी
महंगा पेट्रोल—जिम्मेदारी किसकी, समाधान क्या?
पिछले कुछ समय से देशभर में एक चिंता लगातार गूंज रही है—पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतें। यह केवल वाहन चालकों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि हर उस नागरिक के जीवन को प्रभावित कर रही है जो रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर निर्भर है। पेट्रोल…
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सावधान : जनगणना के नाम पर साइबर ठगी
डिजिटल भारत की तेज़ रफ्तार ने जहां आम नागरिकों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों को भी नए अवसर दे दिए हैं। अब स्थिति यह है कि जनगणना जैसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण सरकारी प्रक्रिया को भी ठगी का माध्यम बनाया जा रहा है। गुजरात सहित कई…
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अलनीनो की चुनौती और भारत की तैयारी
दुनिया भर में तेजी से बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच "अलनीनो" एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न होने वाली यह मौसमी घटना भारतीय मानसून को सीधे प्रभावित करती है। भारत…
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राहुल गांधी के आरोप और कांग्रेस की राजनीति पर उठते प्रश्न
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश की एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को “राष्ट्र का गद्दार” बताना केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं और…
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श्रम संस्कार और शिक्षा का भविष्य
भारत दुनिया की सबसे बड़ी बाल आबादी वाला देश है लेकिन विडंबना यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता को लेकर स्थिति लगातार चिंता बढ़ाने वाली होती जा रही है। आज देश के अनेक सरकारी और निजी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभाएं इसलिए…
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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…
भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, डॉग बाइट की भयावह घटनाएं और रेबीज संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा शहरी प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। 19 मई 2026 को भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला इस बहस को केवल…
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पश्चिम एशिया संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल युद्ध और कूटनीति तक सीमित विषय नहीं रह गया है। इसका प्रभाव सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की बढ़ती…
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ट्रम्प जिनपिंग मुलाकात से बदलती विश्व राजनीति
वैश्विक राजनीति के वर्तमान दौर में आदर्शवाद और नैतिक मूल्यों से अधिक महत्व राष्ट्रीय हितों को दिया जा रहा है। हर देश अपने आर्थिक सामरिक और राजनीतिक हितों के अनुसार निर्णय ले रहा है और यही नई विश्व व्यवस्था की वास्तविकता बन चुकी है। 13 से 15…
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सनातन पर टिप्पणी नहीं आत्ममंथन की आवश्यकता
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा विधानसभा में दिया गया यह बयान कि “लोगों को बांटने वाले सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए” न केवल करोड़ों लोगों की आस्था को…
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दवाओं में मिलावट : स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट
देश में हाल ही में सामने आई अमानक और गुणवत्ता में फेल दवाओं की खबरों ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। जिन दवाओं को लोग अपने जीवन की रक्षा और बीमारी से मुक्ति की आशा में खरीदते हैं यदि वही दवाएं उनके शरीर में जहर का काम करने लगें तो यह…
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