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लेख/सम सामयिकी
व्यापार समझौता बराबरी का हो दबाव का नहीं
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता केवल दो देशों के बीच आर्थिक साझेदारी का विषय नहीं है बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति औद्योगिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जुड़ा हुआ प्रश्न है। दोनों देशों ने संकेत दिए हैं…
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राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और जवाबदेही की कसौटी
अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी से जुड़े आरोपों ने स्वाभाविक रूप से गंभीर चिंता पैदा की है। समाचारों के अनुसार जांच के दौरान कई…
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आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता ही राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार
भारत के सामने आतंकवाद आज भी सबसे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों में से एक बना हुआ है। पिछले कई दशकों में देश ने सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और कट्टरपंथी नेटवर्क के रूप में अनेक चुनौतियों का सामना…
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भ्रष्टाचार पर प्रहार की चुनौती: केवल नारे नहीं व्यवस्था और समाज दोनों में बदलाव जरूरी
भ्रष्टाचार आज केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अधिकांश देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यह केवल आर्थिक संसाधनों की चोरी नहीं बल्कि शासन व्यवस्था जनविश्वास और विकास की गति को कमजोर करने वाला गंभीर सामाजिक अपराध भी है। जब…
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चिकित्सा में सेवा भावना का पुनर्जागरण जरूरी
हर वर्ष 1 जुलाई को भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यह दिन महान चिकित्सक, शिक्षाविद् और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र राय की स्मृति को समर्पित है। उन्होंने चिकित्सा को केवल जीविका का साधन नहीं बल्कि मानव सेवा का…
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661 करोड़ का सवाल: जवाबदेही किसकी?
हरियाणा में सामने आया 661 करोड़ रुपये के कथित आईडीएफसी बैंक प्रकरण केवल एक वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही वित्तीय अनुशासन और शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी गंभीर परीक्षा बन गया है। इस मामले में वरिष्ठ…
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विदेशी विश्वविद्यालयों का आगमन: भारतीय उच्च शिक्षा के लिए नई दिशा
भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है जो आने वाले वर्षों में देश की शैक्षणिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है। लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण वैश्विक शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारतीय विद्यार्थियों को विदेशों का रुख…
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आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज वैध?
भारत में नागरिकता को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस तेज हो गई है। विदेश मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि पासपोर्ट अपने-आप में नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं है, विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है…
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संवादहीनता और सामाजिक दबाव की भयावह कीमत
पुणे में केतन अग्रवाल हत्याकांड ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है। असीम संभावनाओं से भरे 26 वर्षीय युवक की हत्या उसकी मंगेतर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर कर दी। इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया बल्कि रिश्तों, विवाह और सामाजिक…
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मुंबई में नई राजनीतिक दरारें दिखाती ‘सफेद पट्टी’
मुंबई में जैन समुदाय और स्थानीय निवासियों के बीच सड़कों पर बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल एक आवासीय सोसायटी का मतभेद नहीं है बल्कि यह देश में बढ़ती सामाजिक और सांप्रदायिक संवेदनशीलता का संकेत भी है। किसी भी लोकतांत्रिक…
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