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लेख/सम सामयिकी
देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी
उत्तराखंड की पहचान देवभूमि के रूप में केवल उसके धार्मिक स्थलों, आध्यात्मिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं है, बल्कि यहां की स्वस्थ, संस्कारित और ऊर्जावान युवा पीढ़ी भी इसकी वास्तविक शक्ति है। ऐसे में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू…
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नीला ड्रम कांड: मुस्कान और साहिल को फांसी
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम कांड ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। यह मामला केवल एक जघन्य हत्या की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों में विश्वास, मानवीय संवेदनाओं, अपराध की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। मुस्कान और साहिल से…
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चुनौती की राजनीति नहीं, जनता के मुद्दों पर हो चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और एक-दूसरे को चुनौती देने का दौर तेज होने लगा है। अयोध्या, गोरखपुर और संभल जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्रों के नाम लेकर मुख्यमंत्री योगी…
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जंतर-मंतर पर पहरा और लोकतंत्र से जनता की बेदखली
लोकतंत्र की असली ताकत केवल चुनाव कराने और सरकार बनाने में नहीं बल्कि असहमति को सुनने और विरोध के अधिकार को सुरक्षित रखने में निहित होती है। जिस व्यवस्था में जनता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर सके और सत्ता से सवाल पूछ सके वही व्यवस्था…
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डीप स्टेट का अदृश्य युद्ध: लोकतंत्र और संप्रभुता पर खतरा
इक्कीसवीं सदी में किसी देश को कमजोर करने के लिए हमेशा युद्ध और सैन्य शक्ति की जरूरत नहीं होती। डिजिटल दुष्प्रचार सामाजिक विभाजन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करके भी किसी देश की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।…
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दिल्ली में सीजेपी का प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले जिस तरह पुलिस ने कार्रवाई की उसने लोकतंत्र में असहमति और विरोध के अधिकार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के…
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सियासत के केंद्र में फिर लोकतंत्र और संविधान
भारतीय राजनीति में कई बार कुछ सौ मीटर की दूरी भी इतिहास की लंबी यात्रा बन जाती है। संसद से आकाशवाणी तक निकला राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के सांसदों का मार्च इसी राजनीतिक घटनाक्रम की एक मिसाल है। यह केवल चुनाव आयोग तक पहुंचने की कोशिश नहीं…
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नाना पाटेकर : एक आवाज जो पर्दे से निकलकर समाज तक पहुंची
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो केवल अभिनय नहीं करते बल्कि अपने किरदारों के जरिए समाज के भीतर छिपे सवालों को आवाज देते हैं। नाना पाटेकर उन्हीं विरले कलाकारों में से एक थे। 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में गोवा…
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क्या राहुल गांधी की भविष्यवाणी बदलाव की आहट?
राहुल गांधी ने करीब चार महीने पहले दावा किया था कि नरेंद्र मोदी सरकार एक वर्ष के भीतर गिर जाएगी। उस समय भाजपा ने उनके बयान को राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन अब एसआईआर को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उठ रहे सवालों और…
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नशे में उड़ता पंजाब
पंजाब को भारत का अन्न भंडार कहा जाता है तो इसके पीछे ठोस कारण हैं। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में महज लगभग डेढ़ प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह राज्य खाद्यान्न उत्पादन और केंद्रीय पूल में गेहूं-चावल की आपूर्ति में असाधारण योगदान देता है।…
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