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लेख/सम सामयिकी

पंजाब में फिर करवट ले रही सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में पुराने सवालों को फिर से जीवित कर दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट मानना शायद जल्दबाजी…
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युवा सवालों से बदलेगी लोकतंत्र की राजनीति

भारत आज केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है बल्कि सबसे युवा लोकतंत्रों में भी अग्रणी है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और आने वाले वर्षों में जेन-जी तथा उसके बाद जेन-अल्फा राजनीति और लोकतांत्रिक विमर्श की दिशा तय करने वाली…
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संसद में शोर नहीं संवाद चाहिए

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संसद है। संसद केवल कानून बनाने की संस्था नहीं बल्कि जनता की आकांक्षाओं समस्याओं और देश की दिशा तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। सत्ता पक्ष को जहां जनादेश के आधार पर सरकार चलाने की जिम्मेदारी मिली…
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ई20 पेट्रोल पर देशभर में बवाल

ई-20 ईंधन नीति को लेकर एक बार फिर टकराव की तस्वीर सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और लागू…
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उपचुनाव के नतीजे और बदलाव की आहट

जनता ने बदलाव की राजनीति का शंखनाद कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दतिया की जनता के लिए कहा गया यह वाक्य भले ही एक विधानसभा सीट के चुनावी नतीजे के संदर्भ में आया हो लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसकी…
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किसानों तक पहुंचे योजनाओं का वास्तविक लाभ

गांवों में खेती केवल रोजगार का साधन नहीं है बल्कि लाखों परिवारों की जिंदगी का आधार है। हर मौसम किसान अपने खेत में केवल बीज नहीं बोता बल्कि अपने परिवार की उम्मीदें उसकी आय और आने वाले दिनों का भरोसा भी बोता है। लेकिन विडंबना यह है कि खेती…
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जवाबदेही केवल सत्ता की नहीं समाज की भी

लोकतंत्र में जवाबदेही का सबसे बड़ा आग्रह सत्ता और पद पर बैठे लोगों से किया जाता है। यह स्वाभाविक भी है। जिस व्यक्ति के पास अधिकार है उससे उसके निर्णयों और कार्यों का हिसाब भी मांगा जाएगा। किसी मंत्री के विभाग में भ्रष्टाचार हो तो मंत्री…
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लोकतंत्र में छात्रों की आवाज और संवाद की आवश्यकता

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां प्रत्येक नागरिक को अपनी बात कहने और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं होता बल्कि उसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि सरकार और…
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सद्गुरु ही जीवन के सच्चे पथप्रदर्शक

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। गुरु वह चेतना हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर मनुष्य के जीवन में ज्ञान, विवेक और आत्मबोध का प्रकाश फैलाते हैं। यही कारण है कि हमारी परंपरा में गुरु को ईश्वर तक पहुंचने…
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शिक्षा सुधार से ही विकसित भारत का मार्ग

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों में नहीं बल्कि उसके शिक्षित और सक्षम नागरिकों में निहित होती है। जापान दक्षिण कोरिया सिंगापुर और फिनलैंड जैसे देशों ने यह सिद्ध किया है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था सीमित संसाधनों वाले…
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