बदहाल यमुना पर जिम्मेदार मौन, मथुरा से वृंदावन तक गंदे नालों का ज़हर

मथुरा। यमुना शुद्धिकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन मथुरा वृंदावन की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। मथुरा से वृंदावन तक यमुना में खुलेआम गंदे नाले गिर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। सोशल मीडिया पर यमुना में गिरते नालो की वीडियो वायरल हो रही है जबकि स्थानीय विधायक और निगम के अधिकारी दावा करते है कि बड़ी संख्या में नाले टेप कर दिए गए है।
जयसिंहपुरा क्षेत्र में मसानी नाले का काला गंदा पानी सीधे यमुना में गिरता देखा गया। नाले का दूषित पानी यमुना में मिलते ही नदी का रंग बदल रहा है। तस्वीरें साफ कह रही हैं कि यमुना शुद्धिकरण सिर्फ कागजों में हो रहा है जबकि जमीन पर यमुना दम तोड़ रही है।
जहां-जहां नालों का पानी यमुना में गिर रहा है वहां प्रदूषण सबसे ज्यादा है। यमुना किनारे जगह-जगह मलबा और कूड़े के ढेर पड़े हैं। नदी के घाट बदबू से भर गए हैं। श्रद्धालु जिस यमुना में आस्था की डुबकी लगाते हैं उसी में नालों का गंदा पानी मिलाया जा रहा है।
सरकार ने यमुना शुद्धिकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन यह पैसा आखिर गया कहां यह बड़ा सवाल है जो स्थिति मौके पर दिख रही है उससे साफ है कि शुद्धिकरण योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं।
लोगों का कहना है कि मथुरा वृंदावन क्षेत्र में यमुना अब नदी नहीं बल्कि बहता नाला बनती जा रही है। अगर समय रहते नालों को रोका नहीं गया तो आने वाले दिनों में यमुना सिर्फ नाम की नदी रह जाएगी। अब सवाल यह है कि क्या यमुना को बचाने के लिए कोई आगे आएगा या फिर जिम्मेदार ऐसे ही चुप बैठे रहेंगे।