मथुरा। एशिया की प्रतिष्ठित तेल रिफाइनरियों में शुमार मथुरा रिफाइनरी की आवासीय कॉलोनी रिफाइनरी नगर में हुई एक हाई-प्रोफाइल चोरी की वारदात 100 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रहस्य बनी हुई है। देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली कॉलोनी में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
जानकारी के अनुसार रिफाइनरी नगर के वीआईपी जोन में स्थित सीजीएम के सरकारी आवास को चोरों ने निशाना बनाया था। हैरानी की बात यह है कि यह आवास ईडी बंगले के ठीक समीप स्थित है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद चोर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए और आज तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका।
सूत्रों के मुताबिक चोरी वाली रात कॉलोनी में बाहर से एक थ्री-व्हीलर ऑटो प्रवेश करता देखा गया था। आश्चर्यजनक रूप से मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के रजिस्टर में उस वाहन की कोई एंट्री दर्ज नहीं मिली। जबकि नियमों के अनुसार प्रत्येक बाहरी वाहन का विवरण दर्ज किया जाना अनिवार्य होता है। इस तथ्य ने गेट सुरक्षा और कॉलोनी के भीतर तैनात डीजीआर गार्डों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद भी रिफाइनरी प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल की चुप्पी और पुलिस जांच की धीमी रफ्तार को लेकर कॉलोनी के निवासियों में भी असंतोष देखा जा रहा है। दूसरी ओर रिफाइनरी थाना पुलिस भी 100 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
मामले में जब मथुरा रिफाइनरी के कॉर्पोरेट प्रबंधक विवेक शर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि घटना की उन्हें तत्काल जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह सीजीएम सुधांशु कुमार से जानकारी प्राप्त कर मामले की स्थिति स्पष्ट करेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक संपत्ति और वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला सुरक्षा तंत्र आखिर एक हाई-प्रोफाइल चोरी की गुत्थी सुलझाने में क्यों नाकाम साबित हो रहा है? क्या यह केवल जांच में लापरवाही है या फिर मामले के पीछे कोई ऐसा रहस्य छिपा है, जिसकी परतें अभी खुलनी बाकी हैं?
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