मथुरा: कुदरत का कहर, आंधी-बारिश ने मचाई तबाही; मलबे में दबकर पिता व तीन मासूम गंभीर
चौमुहां में मकान की छत गिरने से एक ही परिवार के चार लोग घायल, अस्पताल में भर्ती
फसलों पर पड़ी कुदरत की मार: गेहूं और सरसों की तैयार फसलें खेतों में बिछीं
12 घंटे से बिजली आपूर्ति ठप, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
मथुरा। जनपद में बुधवार देर शाम अचानक बदले मौसम के मिजाज ने ग्रामीण क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। भीषण धूल भरे अंधड़ और उसके बाद हुई मूसलाधार बारिश गरीब परिवारों के लिए काल बनकर आई। कहीं आशियाने उजड़ गए तो कहीं साल भर की मेहनत (फसलें) मिट्टी में मिल गई। सबसे दर्दनाक हादसा कस्बा चौमुहां के जाटव मोहल्ला में हुआ, जहां एक मकान की छत गिरने से पिता और उनके तीन मासूम बच्चे मलबे में दबकर लहूलुहान हो गए।
जानकारी के अनुसार चौमुहां निवासी राजू पुत्र छिद्दी बुधवार शाम को अपने बच्चों के साथ कमरे में थे तभी तेज आंधी के दबाव से मकान की छत ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिर गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। मूसलाधार बारिश के बीच ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर मलबे को हटाया और दबे हुए राजू, नहना, नितेश और बबीता को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है और घर का सारा राशन व सामान नष्ट हो गया है।

तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 घंटों से जिले के कई ग्रामीण इलाकों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप है। खंभे गिरने और तार टूटने से जनजीवन ठप हो गया है।
कृषि क्षेत्र में भी इस आपदा ने गहरा घाव दिया है। मांट, नंदगांव, कोसीकलां और चौमुहां क्षेत्र के खिटाविटा, संचोली, गिन्डोह, कादोना और थिरथला सहित दर्जनों गांवों में गेहूं और सरसों की फसलें खेतों में बिछ गई हैं। किसान पप्पू ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा साल भर की मेहनत एक पल में मिट्टी में मिल गई अब परिवार पालना मुश्किल होगा।
हादसे और फसलों के नुकसान को देखते हुए क्षेत्र के लोगों और किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित सरकारी मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक-दो दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रह सकता है, जिससे किसानों की चिंता की लकीरें और गहरी हो गई हैं।