विश्व दुग्ध दिवस पर सीआईआरजी में महिला बकरी पालकों का सम्मान, बकरी दुग्ध के पोषण और रोजगार संभावनाओं पर हुई चर्चा
मथुरा। विश्व दुग्ध दिवस 2026 के अवसर पर 1 जून को आईसीएआर–केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मखदूम में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व दुग्ध दिवस की थीम “महिला किसानों का सम्मान” रही, जिसके अनुरूप कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़ी 25 महिला बकरी पालक किसानों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चाटली ने की। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारियों ने भी सहभागिता की। वक्ताओं ने बकरी दुग्ध उत्पादन के माध्यम से गरीब एवं सीमांत किसानों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में बकरियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही बकरी पालन एवं दुग्ध उत्पादन में महिला किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि बकरी का दूध अत्यधिक सुपाच्य और हाइपोएलर्जेनिक होता है, जो बच्चों, बुजुर्गों तथा लैक्टोज असहिष्णुता से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इसके पोषण संबंधी गुणों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि यह मोटापे के प्रबंधन, अवशोषण विकार, अस्थि स्वास्थ्य तथा रोगाणुरोधी, सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, मधुमेहरोधी और कैंसररोधी गुणों से भी जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त आंतों, मस्तिष्क और हृदय स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों को भी रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सीआईआरजी द्वारा विकसित विभिन्न मूल्य संवर्धित बकरी दुग्ध उत्पादों एवं प्रसंस्करण तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
अपने संबोधन में निदेशक डॉ. मनीष कुमार चाटली ने कहा कि संस्थान बकरी पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से दुग्ध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन संबंधी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीआईआरजी किसानों को नाममात्र किराये पर दूध प्रसंस्करण तथा आइसक्रीम निर्माण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि देश में बकरी दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को और अधिक मजबूत बनाया जाए, जिससे डेयरी बकरी क्षेत्र की अप्रयुक्त संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए पोषण सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा दिया जा सके।