जवाहरबाग कांड के 10 वर्ष पूरे, शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को श्रद्धांजलि, पत्नी ने उठाए अनसुलझे सवाल
मथुरा। दो जून 2016 की वह भयावह शाम आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जब हिंसा की आग में जवाहरबाग सुलग उठा था। जवाहरबाग कांड को मंगलवार को पूरे 10 वर्ष हो गए, लेकिन उस दिन की दर्दनाक यादें और उससे जुड़े कई अनसुलझे सवाल आज भी लोगों को बेचैन करते हैं। पुलिस अधिकारियों के सर्वोच्च बलिदान और लंबे कानूनी संघर्ष के बावजूद इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।
जवाहरबाग स्थित शहीद स्मारक पर मंगलवार को शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी ने नम आंखों से पति को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए अपने मन का दर्द व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके पति ने कर्तव्य पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन दस वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे वास्तविक हकदार थे।
अर्चना द्विवेदी ने कहा कि सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और नौकरी तो मिली, लेकिन उन्होंने जो खोया है उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनके दर्द को कोई नहीं समझ सकता। उनका कहना था कि विभिन्न सरकारें आईं और गईं, लेकिन मुकुल द्विवेदी को आज तक कोई वीरता पुरस्कार नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि मुकुल द्विवेदी ने पूरी पुलिस टीम का नेतृत्व करते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन किया, वर्दी का मान रखा और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वर्तमान में बड़ा बेटा कौस्तुभ बीटेक करने के बाद नौकरी कर रहा है, जबकि छोटा बेटा आयुष एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। अर्चना द्विवेदी ने कहा कि उन्हें इस बात का सबसे अधिक दुख है कि सर्वोच्च बलिदान के बावजूद उनके पति को अब तक उचित सरकारी सम्मान नहीं मिला।
अर्चना द्विवेदी ने जवाहरबाग कांड की जांच को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के दो प्रमुख बिंदु थे। पहला, घटना के समय जवाहरबाग में कौन-कौन लोग मौजूद थे और पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता क्या थी। दूसरा, इस पूरे प्रकरण के पीछे किसका संरक्षण था, रामवृक्ष को समर्थन किससे मिला, उसे जवाहरबाग में धरने की अनुमति कैसे मिली और वहां भारी मात्रा में हथियार कैसे पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब आज भी पूरी तरह सामने नहीं आ सके हैं। जवाहरबाग कांड के एक दशक बाद भी कई ऐसे तथ्य हैं जिन पर अब तक स्पष्टता नहीं हो सकी है। यही कारण है कि इस घटना की यादें आज भी लोगों के मन में दर्द और अनेक प्रश्न छोड़ जाती हैं।