मथुरा में शराब ठेकों पर ओवर रेटिंग धड्ड्ले से , आबकारी विभाग को नहीं है चैकिंग की फ़ुरसत

​मथुरा। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही जनपद के आबकारी विभाग के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। जिले की अधिकांश शराब और बीयर की दुकानों पर खुलेआम उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाला जा रहा है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर तयशुदा एमआरपी से 10 से 20 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली अब एक ‘नया सामान्य’ बन गई है जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।

​केंद्र सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ के तमाम दावों के बीच, मथुरा के ठेकों पर कंप्यूटर जनरेटेड रसीद (POS मशीन से) देना तो दूर की बात है, रसीद मांगना ही गुनाह मान लिया गया है। आबकारी नीति के तहत हर दुकान पर पीओएस मशीन से बिल देना अनिवार्य है लेकिन सेल्समैनों की मनमानी के आगे नियम बेबस नजर आते हैं। जब कोई जागरूक नागरिक रसीद की मांग करता है, तो उसे न केवल मना किया जाता है, बल्कि अभद्रता और धमकियों का सामना करना पड़ता है।

​जानकारों का कहना है कि यह केवल एक-दो रुपये की बात नहीं है। यदि एक बोतल पर औसतन 10 रुपये की अवैध वसूली भी मानी जाए, तो पूरे प्रदेश भर में यह आंकड़ा प्रतिदिन करोड़ों रुपये का खेल बन जाता है। सवाल यह है कि जब शासन स्तर पर कीमतें निर्धारित हैं तो दुकानों पर यह ‘समानांतर टैक्स’ किसके संरक्षण में वसूला जा रहा है? क्या यह सरकारी राजस्व की सीधी चोरी नहीं है? ​इस अवैध वसूली से परेशान होकर अब मथुरा के सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक लामबंद हो गए हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) और आबकारी विभाग के टोल-फ्री नंबर पर शिकायतों की झड़ी लगा दी गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे अब मूकदर्शक बनकर नहीं रहेंगे।
​विभाग समय-समय पर कार्रवाई का ढिंढोरा तो पीटता है लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध वसूली पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे मामले को उच्च न्यायालय और उपभोक्ता फोरम में ले जाने के लिए मजबूर होंगे।

​जनता की प्रमुख मांगें:
​सीसीटीवी जांच: सभी ठेकों पर लगे कैमरों की फुटेज की तत्काल जांच हो ताकि अवैध वसूली का सच सामने आ सके।
​अनिवार्य बिलिंग: हर ग्राहक को पीओएस मशीन से रसीद देना शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए।
​सख्त कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले और ग्राहकों को धमकाने वाले ठेकेदारों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं।