Dussehra 2025 : विजया दशमी का श्रवण नक्षत्र ने बढ़ाया महत्व

अधर्म पर धर्म की विजय एवं असत्य पर सत्य की विजय का महापर्व विजयादशमी 02 अक्टूबर आश्विन शुक्ला दशमी बृहस्पतिवार को सम्पूर्ण भारत वर्ष में मनाया जा रहा है। इस वर्ष ज्योतिषशास्त्र के अनुसार विजयादशमी के पर्व पर उत्तराषाढा एवं ‌श्रवण नक्षत्र की युति हो रही है इससे दशहरा पर्व का विशेष महत्व बताया जा रहा है। इस सम्बन्ध में दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि त्रेता युग में भगवान श्री राम ने भी नौ दिन तक शक्ति की उपासना कर मां जगदम्बा का आव्हान किया था और दशमी को अधर्मि अत्याचारी रावण का वध कर पृथ्वी को आसुरी शक्तियों से मुक्ति दिलवाई। उन्होंने बताया कि दशमी तिथि की शुरुआत 01 अक्टूबर को सायं 07 बजकर 02 मिनट होगी और 02 अक्टूबर को सायं 07 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।

इस अवसर पर संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मथुरा महानगर अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने कहा कि विजयादशमी का महापर्व सनातन धर्म के प्रमुख पर्वों में माना जाता है उन्होंने कहा भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों में लोग अपनी अपनी लोक परम्पराओं के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं विजया दशमी को शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है और शमी के वृक्ष का भी पूजन किया जाता है सनातन धर्मानुसार विजया दशमी के दिन प्रदोष काल में शमी वृक्ष का पूजन करना शुभ माना जाता है जिससे शत्रु को पराजित करने तथा परिवार में धन धान्य,सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।कुछ स्थानों पर तो अश्व पूजन भी किया जाता है ।

इस अवसर पर रामदास चतुर्वेदी शास्त्री, नारायण प्रसाद शर्मा,ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक चतुर्वेदी, पंकज ज्योतिषाचार्य,साहित्याचार्य शरद, सौरभ चतुर्वेदी, ऋषभ देव, गोविंद देव, मनोज , मनीष पाठक निरंजन शास्त्री आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए अधर्म पर धर्म की विजय एवं असत्य पर सत्य की विजय के महापर्व पर पौराणिक जानकारी दी और आश्विन माह के दशमी विजयादशमी पर धार्मिक अनुष्ठान यज्ञ हवन पूजन कर विश्व कल्याण की कामना करते रहने के लिए सभी से आग्रह किया