ज्योतिष शास्त्र में कर्मों के निर्णायक माने जाने वाले शनि देव की चाल में लगभग 30 वर्षों बाद एक दुर्लभ परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 5 दिसंबर से शनि 0 अंश पर पहुंचकर बाल्यावस्था में प्रवेश कर चुके हैं और 20 फरवरी 2026 तक उनका अंश बल बढ़कर 6 डिग्री तक जाएगा। इस अवधि को कई राशियों के लिए आर्थिक राहत और भाग्य परिवर्तन का समय माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब शनि बाल्यावस्था में होते हैं तो वे अपनी कठोरता त्याग देते हैं। इसका प्रभाव यह होता है कि साढ़ेसाती और ढैया से पीड़ित जातकों को भी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक राहत मिलने लगती है।
🔹 वृषभ राशि: आय और तरक्की के योग
वृषभ राशि के जातकों के लिए आने वाले दो महीने बेहद शुभ माने जा रहे हैं। शनि आपके लाभ और आय भाव में सक्रिय हैं, जिससे नई नौकरी के प्रस्ताव, वेतन वृद्धि और व्यापार में अप्रत्याशित मुनाफे के योग बन रहे हैं। विशेष रूप से रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट और मेटल से जुड़े कारोबारियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
उपाय: शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
🔹 कन्या राशि: अटके काम होंगे पूरे
कन्या राशि वालों के लिए शनि का यह गोचर किसी रिलीफ पैकेज से कम नहीं है। सप्तम भाव के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी और विवाह के योग बनेंगे। लंबे समय से अटके सरकारी और कानूनी मामलों में प्रगति होगी। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। इस अवधि में घर या जमीन खरीदने के भी प्रबल योग हैं।
🔹 सिंह राशि: विपरीत राजयोग से धन लाभ
सिंह राशि में शनि अष्टम भाव में रहकर विपरीत राजयोग बना रहे हैं, जो जून 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान शेयर बाजार, निवेश या पैतृक संपत्ति से अचानक धन लाभ के संकेत हैं। शनि की बाल्यावस्था के कारण पुरानी बीमारियों से राहत और ऊर्जा में वृद्धि देखने को मिलेगी।
🔹 कर्मों की शुद्धता जरूरी
ज्योतिषियों का मानना है कि भले ही शनि इस समय कम कष्ट दे रहे हों, लेकिन इस अवधि में कर्मों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जो जातक ईमानदारी और नैतिकता के मार्ग पर चलते हैं, उन पर शनि देव की विशेष कृपा बनी रहती है।
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