मथुरा जिला जेल में बंदी ने की आत्महत्या, न्यायिक देरी से था भारी तनाव में

​मथुरा। जिला कारागार में बीती रात एक बंदी द्वारा आत्महत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुरेश (57 वर्ष) के रूप में हुई है, जो गोवर्धन थाने के अंतर्गत एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल में निरुद्ध था। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बंदी मानसिक रूप से काफी परेशान था।
​जेल प्रशासन के अनुसार सुरेश अपने ऊपर चल रहे मुकदमों की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर गहरे तनाव में था। बताया जा रहा है कि उच्च न्यायालय में उसकी फाइल लंबित होने और बेल (जमानत) न मिल पाने के कारण वह हताश हो चुका था। उसने पिछले एक साल में तीन से चार वकील भी बदले थे लेकिन उसे राहत नहीं मिल रही थी।

​घटना रात करीब 2:00 बजे की है। सुरेश अपनी बैरक के शौचालय में गया और वहां फंदा लगाकर फांसी लगा ली । जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा तो बैरक में तैनात रात के पहरेदार ने जाकर देखा जहाँ सुरेश फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। ​जेल अधीक्षक ने बताया कि सूचना मिलते ही सुरेश को तुरंत नीचे उतारा गया और जेल अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। ​जेल प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और संबंधित अधिकारियों को घटना की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जा रही है।

​”बंदी सुरेश काफी समय से अवसाद में था। 25 मार्च को उसने अपने पिता से पीसीओ के जरिए बात की थी जिसकी कॉल रिकॉर्डिंग से स्पष्ट है कि वह वकील की पैरवी और बेल न होने से बेहद मायूस था। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

— अंशुमन गर्ग, जेल अधीक्षक मथुरा।