मथुरा का पुण्य तीर्थ विश्राम घाट उपेक्षा का शिकार
क्या मथुरा की आध्यात्मिक पहचान बनती जा रही है बोझ?
मथुरा। श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी जो विश्वभर में सनातन संस्कृति और ब्रज परंपरा का प्रमुख केंद्र मानी जाती है, आज सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रही है। पुण्य तीर्थ विश्राम घाट जहाँ से श्रद्धालुओं की ब्रज यात्रा प्रारंभ होती है, अव्यवस्था, गंदगी और बदहाल सुविधाओं के बीच अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है।
पुण्य तीर्थ विश्राम घाट को ब्रज का प्रवेश द्वार कहा जाता है लेकिन वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। घाट पर साफ-सफाई का अभाव है, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएँ नदारद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मथुरा नगर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जाम की समस्या रोजमर्रा की बात बन चुकी है। नो-एंट्री के नियम केवल बोर्डों तक सीमित रह गए हैं। झूलते बिजली के तार और टूटी सड़कें किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं।
यमुना नदी, जो मथुरा की धार्मिक पहचान का केंद्र है, आज प्रदूषण से कराह रही है। श्रद्धालु आस्था के साथ घाटों पर पहुँचते हैं, लेकिन गंदा पानी चिंता का विषय बना हुआ है। इस पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जनप्रतिनिधि इस गंभीर स्थिति पर मौन साधे हुए हैं। विधायक और सांसदों की निष्क्रियता से जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा काशी और अयोध्या में किए गए विकास कार्यों की तरह मथुरा को भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं मथुरा के हालात देखें, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
मथुरा के नागरिकों और श्रद्धालुओं की मांग है कि पुण्य तीर्थ विश्राम घाट के सौंदर्यीकरण, यमुना की सफाई, यातायात सुधार और बुनियादी सुविधाओं के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएँ। अब सवाल यह है क्या मथुरा को भी वह सम्मान और विकास मिलेगा, जिसकी वह हकदार है, या आस्था का यह केंद्र यूँ ही उपेक्षा का शिकार बना रहेगा?