2010 से नहीं बढ़ी वित्तीय सीमा, महंगाई से टूटी कमर: मथुरा में एमईएस ठेकेदारों ने बुलंद की आवाज

2025–2032 एनलिस्टमेंट नवीनीकरण में देरी और e-MB की तकनीकी खामियों से ठेकेदार परेशान; कम दरों पर टेंडर देने वालों की थर्ड-पार्टी जांच की मांग

​मथुरा । सैन्य अभियंत्रण सेवा से जुड़े सैकड़ों ठेकेदारों के सामने गहराते आर्थिक संकट को लेकर बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मथुरा शाखा ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य अभियंता, हेडक्वार्टर कमांडर वर्क्स इंजीनियर मथुरा को एक ज्ञापन सौंपकर लंबे समय से लंबित समस्याओं के तुरंत समाधान की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मुद्दों को जल्द हल नहीं किया गया, तो आने वाले समय में सैन्य निर्माण कार्यों पर विपरीत असर पड़ेगा और ठेकेदार समुदाय कंगाली के कगार पर पहुंच जाएगा।
​ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2025–2032 की अवधि के लिए पंजीकृत ठेकेदारों के एनलिस्टमेंट का नवीनीकरण अब तक नहीं हो सका है, जिससे ठेकेदार नई निविदाओं में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं। वर्ष 2010 के बाद से ठेकेदारों की वित्तीय सीमाओं में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एसोसिएशन ने वर्तमान बाजार दरों के अनुसार इसे तत्काल रिवाइज करने की मांग की। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण निर्माण सामग्री की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं। भारतीय रेलवे की तर्ज पर मूल्य वृद्धि की भरपाई का प्रावधान लागू करने की मांग की।
इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों के कारण भुगतानों में हफ्तों का विलंब हो रहा है। साथ ही काम पूरा होते ही 100% परफॉर्मेंस सिक्योरिटी तुरंत लौटाने की मांग उठाई गई। टेंडरों के अनुमोदन में लग रहे अत्यधिक समय पर चिंता जताते हुए एकीकृत वित्तीय सलाहकार की भूमिका केवल दस्तावेज जांच तक सीमित रखने की मांग की गई। निर्धारित दरों से असामान्य रूप से कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों से अतिरिक्त प्रदर्शन गारंटी ली जाए और सरकारी धन व गुणवत्ता की सुरक्षा के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण अनिवार्य किया जाए।
ज्ञापन सौंपते समय BAI मथुरा शाखा के चेयरमैन राजेन्द्र सिंह यादव, सचिव तरुण मंगला सहित आदि एमईएस ठेकेदार उपस्थित रहे।