कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमी कृष्णनगरी, ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजा पाञ्चजन्य

– श्रीकृष्णोत्सव-2026 में जन्माष्टमी की शाम भक्ति संगीत के नाम, मोहित शेवानी और स्नीति मिश्रा की प्रस्तुतियों ने भी बांधा समां

मथुरा। जन्माष्टमी पर शुक्रवार को कृष्णनगरी में भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि हर ओर कन्हैया के जयकारे गूंजते नजर आए। श्रीकृष्णोत्सव-2026 के तहत डैम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिनभर भक्ति और संगीत की स्वर लहरियां बिखरीं। शाम को प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल की भजन संध्या ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके भजनों पर श्रद्धालु और युवा झूमते नजर आए और पूरा प्रेक्षागृह ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंज उठा।
जन्माष्टमी के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला दोपहर में युवा कथावाचक मोहित शेवानी की प्रस्तुति ‘कृष्णानायन—सुनिए वो जो कभी कहा नहीं गया’ से शुरू हुआ। उन्होंने संगीतात्मक शैली में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनसुने प्रसंगों को प्रस्तुत किया। कथा और संगीत के भावपूर्ण मेल ने दर्शकों को बांधे रखा।
इसके बाद हार्टफुलनेस फाउंडेशन की ओर से विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति हुई। प्रसिद्ध गायिका स्नीति मिश्रा ने ‘कृष्ण अनंत रंग, अनंत भाव’ की प्रस्तुति से कृष्ण के विविध भावों को सुरों में पिरोया। उनके साथ अनिरबान ने भजन एवं बांसुरी वादन तथा मैत्रेयी राय ने भजन गायन किया। बांसुरी की मधुर तान और भक्ति संगीत ने वातावरण को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया।
इसके बाद कन्हैया मित्तल की भजन संध्या ने जन्माष्टमी के उत्सव को चरम पर पहुंचा दिया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और खाटू श्याम की भक्ति से जुड़े लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियां दीं। ‘श्याम से मिलने का सत्संग’, ‘मेरे बांके बिहारी लाल’, ‘कीर्तन की है रात’, ‘हारे के सहारे आजा’ जैसे भक्ति गीतों पर श्रद्धालु तालियां बजाते और झूमते नजर आए।
कन्हैया मित्तल की आवाज में कृष्ण भक्ति और श्याम भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भजनों के बीच श्रद्धालु लगातार ‘राधे-राधे’ और ‘श्याम बाबा की जय’ के जयकारे लगाते रहे। संगीत की लय बढ़ने के साथ प्रेक्षागृह में मौजूद युवा भी भक्ति में झूमते दिखाई दिए।
पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह के साथ शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और तिराहों पर भी श्रीकृष्णोत्सव का उल्लास दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से बनाए गए सुसज्जित मंचों पर लोक कलाकारों ने कृष्ण लीला, रासलीला, लोक नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से ब्रज की लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। जन्मस्थान की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं के लिए ये प्रस्तुतियां उत्सव का विशेष आकर्षण बनी रहीं।
जन्माष्टमी पर मथुरा में दिनभर भक्ति और संस्कृति की स्वर लहरियां गूंजती रहीं और रात में कन्हैया मित्तल की भजन संध्या के साथ श्रीकृष्णोत्सव का रंग और गहरा हो गया।