चुनाव आयोग की ऐतिहासिक पहल, 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिली ‘होम वोटिंग’ की सुविधा
नई दिल्ली । 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ‘होम वोटिंग’ की शुरुआत की है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60(सी) के तहत अब 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रेणी के मतदाताओं को मतदान केंद्र जाने की जरूरत नहीं होगी। असम, केरल और पुडुचेरी में लागू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, जो शारीरिक अक्षमता के कारण पहले वोट देने से वंचित रह जाते थे। इस सुविधा के लिए पात्र मतदाताओं को अधिसूचना जारी होने के पांच दिनों के भीतर आवेदन करना होता है, जिसके बाद उन्हें घर बैठे पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान का अवसर मिलता है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 2.37 लाख से अधिक मतदाताओं को घर से मतदान करने की मंजूरी दी जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ी संख्या केरल की है, जहां 1.45 लाख से अधिक बुजुर्ग और 62 हजार से ज्यादा दिव्यांग मतदाता अपने घर से ही लोकतंत्र को मजबूत करेंगे। असम में भी लगभग 26 हजार से अधिक लोगों को इस सूची में शामिल किया गया है। यह नई व्यवस्था न केवल चुनावी भागीदारी को बढ़ावा देगी, बल्कि उन परिवारों के लिए भी बड़ी राहत है जिनके बुजुर्ग सदस्य लंबी लाइनों में खड़े होने में असमर्थ हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह एक वैकल्पिक सुविधा है, जो पारदर्शिता और सुगमता पर आधारित है।
घर पर मतदान की प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार किया है। प्रत्येक मतदाता के घर मतदान अधिकारियों की एक टीम भेजी जाएगी, जिसके साथ सुरक्षाकर्मी और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करने के लिए वीडियोग्राफर भी मौजूद रहेगा। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी इस दौरान साथ रहने की अनुमति दी गई है। यह प्रक्रिया 5 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी। इसके अतिरिक्त, जो बुजुर्ग मतदान केंद्र पर आकर वोट देना चाहते हैं, उनके लिए केंद्रों पर व्हीलचेयर और विशेष स्वयंसेवकों की तैनाती जैसे पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि उनका अनुभव सुखद रहे।