प्राइवेट स्कूलों की बेलगाम फीस पर संसद में गूँजी मथुरा के लाल की आवाज़: ‘शिक्षा व्यापार नहीं, अधिकार बने’
नई दिल्ली/मथुरा। राज्यसभा के बजट सत्र के दौरान सांसद चौधरी तेजवीर सिंह ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ट्यूशन फीस के अलावा एडमिशन, एक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है।
प्रधानमंत्री के सुधारों की सराहना, पर स्थानीय लूट पर जताई चिंता
सांसद राज्यसभा तेजवीर सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी सुधारों की सराहना से की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा को आधुनिक और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन कुछ निजी संस्थानों की “मुनाफाखोरी” की प्रवृत्ति सरकार के इन प्रयासों में बाधा बन रही है।
”शिक्षा समाज के निर्माण का आधार है। यदि यह इतनी महंगी हो जाएगी तो ‘समान अवसर’ का संवैधानिक सिद्धांत कमजोर पड़ जाएगा। आज स्थिति यह है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।” — तेजवीर सिंह, राज्यसभा सांसद
सांसद की तीन मुख्य माँगें:
सरकार के समक्ष अभिभावकों के हित में तीन बड़े प्रस्ताव रखे:
सख्त फीस नियंत्रण नीति: निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए एक राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय प्रभावी नीति बने।
पारदर्शिता अनिवार्य हो: स्कूल की फीस संरचना (Fee Structure) पूरी तरह पारदर्शी हो और कोई भी ‘हिडन चार्ज’ न लिया जाए।
मजबूत शिकायत निवारण तंत्र: अभिभावकों की शिकायतों के तुरंत निपटारे के लिए एक प्रभावी जिला स्तरीय व्यवस्था या लोकपाल की नियुक्ति हो।
मथुरा में खुशी की लहर
सांसद द्वारा संसद में इस जमीनी मुद्दे को उठाए जाने के बाद मथुरा-वृंदावन के अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद ने लाखों परिवारों के दिल की बात सदन में रखी है।
अभिभावक संघ के सदस्यों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. सिंह की यह पहल सराहनीय है। अब उम्मीद है कि सरकार निजी स्कूलों की इस ‘फीस लूट’ पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी।