वृन्दावन। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के पावन अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस (राम नवमी) को वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र के 20वें पाटोत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर परिसर को भव्य पुष्प सज्जा से अलंकृत किया गया, जहां सुसज्जित फूल बंगला श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य श्रीविग्रहों का महाभिषेक संपन्न हुआ तथा भगवान को 56 प्रकार के दिव्य भोग अर्पित किए गए।
इस दौरान श्रीराम तारक यज्ञ, हरिनाम संकीर्तन एवं महाआरती का भव्य आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रीराम नाम के संकीर्तन से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम में चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रामचरितमानस का उल्लेख किया— “राम कृष्ण दोऊ एक हैं, अंतर नहीं निमेष।
उनके नयन गंभीर हैं, इनके चपल विशेष।।” उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण में कोई वास्तविक भेद नहीं है, बल्कि दोनों एक ही परम तत्व के भिन्न स्वरूप हैं। श्रीराम मर्यादा, धर्म और कर्तव्य के प्रतीक हैं जबकि श्रीकृष्ण प्रेम और लीला के माध्यम से भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं।
उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और समर्पण भाव के साथ भाग लिया।
इस अवसर पर मथुरा, आगरा, लखनऊ, दिल्ली, नोएडा, जयपुर, भरतपुर सहित विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे और कार्यक्रम का आनंद लिया।
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