मथुरा । दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर ग्राम छरोरा के समीप प्रस्तावित वे-साइड एमेनिटीज (WSA) परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों, ग्रामीणों और व्यापारियों के बीच गहरी चिंता व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि यह परियोजना वर्तमान स्वरूप में लागू होती है, तो यह भविष्य में एक संभावित दुर्घटना स्थल (ब्लैक स्पॉट) बन सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रस्तावित स्थल चेनज संख्या-137 के आसपास स्थित है, जिसकी दूरी निकटतम फ्लाईओवर से लगभग 110 मीटर बताई जा रही है, जबकि प्रचलित मानकों के अनुसार यह दूरी लगभग 300 मीटर होनी चाहिए। इसी प्रकार, यह स्थान एक सक्रिय चक रोड के निकट भी स्थित है, जहां भी सुरक्षित दूरी के मानकों का पालन आवश्यक बताया जाता है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रस्तावित स्थल पर पेट्रोल पंप हेतु आवश्यक न्यूनतम भूमि (30×30 मीटर) उपलब्ध नहीं है, जिससे तकनीकी व्यवहार्यता पर भी प्रश्न उठते हैं।
इसके अतिरिक्त, मथुरा विकास प्राधिकरण की महायोजना-2031 के अनुसार, उक्त क्षेत्र में भविष्य के लिए एक मार्ग प्रस्तावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना स्पष्ट स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक एनओसी के निर्माण गतिविधियाँ प्रारंभ कर दी गई हैं।
नियमों के अनुसार, इस प्रकार की परियोजनाओं में सुरक्षित प्रवेश-निकास, पर्याप्त सर्विस रोड, जल निकासी व्यवस्था एवं यातायात प्रबंधन अनिवार्य होते हैं। हालांकि, स्थल पर इन व्यवस्थाओं की स्पष्टता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे गंभीर चिंता का विषय राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा सीमा से जुड़ा हुआ है। हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों में राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर केंद्र रेखा से लगभग 75 मीटर तक निर्माण पर प्रतिबंध की बात कही गई है, जबकि अन्य परिस्थितियों में भी यह न्यूनतम दूरी लगभग 40 मीटर मानी जाती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रस्तावित WSA परियोजना का अधिकांश हिस्सा इसी 40 मीटर की संवेदनशील सीमा के भीतर आ रहा है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह न केवल स्थापित सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन होगा, बल्कि तेज गति से चलने वाले वाहनों के बीच भारी वाहनों के प्रवेश-निकास के कारण बड़े सड़क हादसों की आशंका को भी कई गुना बढ़ा सकता है।
गौरतलब है कि प्रस्तावित स्थल के निकट एक शैक्षणिक संस्थान स्थित है, जिसके कारण यहां दिनभर छात्र-छात्राओं और हल्के वाहनों का आवागमन रहता है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही से संभावित जोखिम को लेकर अभिभावकों में चिंता है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी और सड़क सुरक्षा जांच कराई जाए तथा सभी आवश्यक मानकों के पालन की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।