छटीकरा चौराहा बना सैकड़ों गांवों की आफत: जाम और अव्यवस्था के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

​प्रशासन के नाम एक संदेश कार्यक्रम के जरिए दी आंदोलन की चेतावनी, सात सूत्रीय ज्ञापन में गिनाईं जनसमस्याएं

मथुरा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित छटीकरा चौराहा इन दिनों भीषण जाम, अव्यवस्था और प्रशासनिक अनदेखी का पर्याय बनता जा रहा है जिसके कारण यह समस्या अब केवल एक गांव तक सीमित न रहकर आसपास के सैकड़ों गांवों के जनजीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। छटीकरा न केवल मथुरा जनपद का प्रमुख प्रवेश मार्ग है बल्कि तीर्थनगरी वृंदावन आने-जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं का मुख्य रास्ता भी है लेकिन प्रतिदिन सुबह-शाम श्रद्धालुओं की बसों, ई-रिक्शा, निजी वाहनों और भारी वाहनों के एक साथ मार्ग पर आ जाने से जाम की स्थिति विकराल हो जाती है जिससे आस्था के केंद्र तक पहुंचने से पहले ही श्रद्धालुओं को धूल-धक्कड़ और ट्रैफिक अराजकता का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ता अतिक्रमण, अवैध कट, बेतरतीब पार्किंग, सड़क किनारे लगे ठेले-खोखे और सर्विस लेन के अवरुद्ध होने के साथ-साथ ट्रैफिक कर्मियों की भारी कमी ने स्थिति को बद से बदतर बना दिया है जिसका खमियाजा एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भुगतना पड़ता है और मरीजों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। जाम की इस भयावह स्थिति के कारण स्कूली बच्चे घंटों फंसे रहते हैं जिससे उनकी सुरक्षा और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं वहीं स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगातार लगने वाले इस जाम से उनके कारोबार पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर रविवार को आयोजित “प्रशासन के नाम एक संदेश” कार्यक्रम के तहत छटीकरा व आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर प्रकाश सिंह के नेतृत्व में अपनी आवाज बुलंद की और मौके पर निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा को सौंपा। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त अनुज कौशिक, सीओ सदर पीपी सिंह तथा थाना प्रभारी जैंत उमेश त्रिपाठी भी उपस्थित रहे जिन्हें ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों से अवगत कराया जिसमें मुख्य रूप से अतिक्रमण हटाना, अवैध कट बंद करना, ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती करना, सर्विस रोड का निर्माण एवं सुधार, ई-रिक्शा संचालन की व्यवस्थित व्यवस्था और भारी वाहनों के लिए समयबद्ध आवागमन लागू करना शामिल है। कार्यक्रम में छटीकरा के साथ-साथ मघेरा, बाटी, तोस, बड़ौता, भदाल, खुशीपुरा, मौरा, सकना, राल, जैंत, देवी आटस, बाबूगढ़ और अझई सहित सैकड़ों गांवों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे जिन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे क्योंकि अब छटीकरा का जाम केवल यातायात की समस्या नहीं बल्कि क्षेत्र की प्रतिष्ठा और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।