यूपी में लीज पर संपत्ति लेने वालों को बड़ी राहत, स्टांप शुल्क पर सरकार ने तय की अधिकतम सीमा

2 लाख रुपये तक के सालाना किराये वाली लीज पर एक वर्ष के लिए अधिकतम 1,000 रुपये स्टांप शुल्क; 10 लाख रुपये तक के सालाना किराये पर भी निर्धारित की गई अलग-अलग सीमा

मथुरा । उत्तर प्रदेश सरकार ने लीज डीड यानी पट्टा विलेखों पर लगने वाले स्टांप शुल्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शासन ने औसत वार्षिक किराये के आधार पर अलग-अलग अवधि के पट्टा विलेखों पर अधिकतम स्टांप शुल्क की सीमा निर्धारित करते हुए निर्धारित राशि से अधिक शुल्क में छूट देने की अधिसूचना जारी की है। यह फैसला उन लोगों और संस्थाओं के लिए राहतकारी साबित हो सकता है, जो संपत्ति को पट्टे पर लेते हैं। शासन की अधिसूचना 12 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है।

उत्तर प्रदेश शासन के स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 9(1)(क) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पट्टा विलेखों पर स्टांप शुल्क में निर्धारित सीमा से अधिक की छूट प्रदान की गई है। यह व्यवस्था राजकीय गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होगी।
शासनादेश के अनुसार औसत वार्षिक किराया दो लाख रुपये तक होने पर एक वर्ष तक की अवधि के पट्टा विलेख पर अधिकतम 1,000 रुपये, एक वर्ष से अधिक और पांच वर्ष तक की अवधि पर 2,000 रुपये तथा पांच वर्ष से अधिक और दस वर्ष तक की अवधि पर 4,000 रुपये स्टांप शुल्क निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार दो लाख रुपये से अधिक और छह लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये पर एक वर्ष तक के पट्टे के लिए अधिकतम 3,000 रुपये, एक से पांच वर्ष तक के लिए 6,000 रुपये और पांच से दस वर्ष तक के लिए 8,000 रुपये की सीमा तय की गई है। छह लाख रुपये से अधिक और दस लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले पट्टा विलेखों पर एक वर्ष तक की अवधि के लिए अधिकतम 4,500 रुपये, एक वर्ष से अधिक और पांच वर्ष तक के लिए 10,000 रुपये तथा पांच वर्ष से अधिक और दस वर्ष तक की अवधि के लिए 13,000 रुपये स्टांप शुल्क निर्धारित किया गया है।

दस लाख रुपये से अधिक के औसत वार्षिक किराये वाले पट्टा विलेखों के मामले में पहले दस लाख रुपये की राशि पर निर्धारित तीसरी श्रेणी के अनुसार शुल्क देय होगा। इसके अतिरिक्त बची हुई राशि पर भारतीय स्टांप अधिनियम की अनुसूची-एक-ख के अनुच्छेद 35 के संबंधित उपखंड में निर्धारित दर से शुल्क की गणना की जाएगी। दोनों राशियों को जोड़कर कुल स्टांप शुल्क तय होगा। सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि यह छूट किसी भी प्रकार के टोल पट्टे और खनन पट्टे पर लागू नहीं होगी। शासन की ओर से जारी आदेश को राजकीय गजट में प्रकाशित कराने तथा प्रदेश के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस निर्णय के तहत स्टांप शुल्क की अधिकतम सीमा पट्टे की अवधि और औसत वार्षिक किराये के आधार पर निर्धारित की गई है। हालांकि, नई व्यवस्था का लाभ अधिसूचना के राजकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से मिलेगा।