मथुरा के प्रसिद्ध सांझी क्राफ्ट को मिला जिले का पहला G.I. टैग

मथुरा । भारत सरकार द्वारा मथुरा की सांझी कला को जी आई टैग प्रदान किया गया है। सांझी को जी.आई. टैग मिलने पर ब्रजवासियों में उत्साह की लहर दौड़ गयी है। उक्त आशय की जानकारी डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने शनिवार की देर रात्रि देते हुए बताया कि इससे बृज की ’सांझी’ सांझ, सज्जा, सजावत तथा राधारानी के प्रेम की प्रतीक इस कला को ग्लोबल मार्केट में पहचान मिलेगी। साथ ही कामगारों को इसका लाभ मिलेगा बृज के लिए यह गर्व की बात है। पुष्टीमार्गीय व बल्लभ कुल से सम्बन्धित यह कला राधा कृष्ण के प्रेम तथा लीलाओं का प्रतीक हैं। जिस तरह से ब्रज की होली प्रसिद्ध है, उसी तरह सांझी भी ब्रज की एक प्राचीनतम कलाओं में अपना एक स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। डी एम ने बताया कि सांझी कला के प्रति लगन और प्रेम से मोहन वर्मा एवं उनके परिवार की लगन आज सांझी को अपने एक नये रूप की तरफ परिवर्तित कर चुकी हैं। हम सभी ब्रजवासियों इस कला के प्रचार प्रसार में उनका अभिनंदन करते है।
इधर ब्रज एवं श्रीकृष्ण पर शोध कर रहे महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सांझी कला की शुरुआत ब्रज में हुई। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी ये कला के जानकार अब कम हैं। विलुप्त होती ब्रज की
इस प्राचीन कला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2022 में विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई थी। उन्होंने को अमेरिकी राष्ट्रपति जो वाइडन को सांझी की कृति भेंट कर इसे नई ऊंचाई दी थी।
सांझी पेपर कटिंग की कृति मथुरा के स्व. चैनसुख दास वर्मा के हाथों की बनाई थी। करीब तीन दशक से मंदिरों तक सीमित रह गई इस कला को जीवंत करने के लिए द ब्रज फाउंडेशन ने करीब दस साल पहले प्राचीन ब्रह्मकुंड पर सांझी मेला का आयोजन किया। वृंदावन में सांझीकारों में राधारमण मंदिर और राधावल्लभ मंदिर के सेवायतों के अलावा भट्ट घराना जुड़ा है। पुराणों में उल्लेख है कि द्वापर में शाम के समय जब भगवान श्रीकृष्ण गोचारण करके आते थे, तो ब्रज गोपियां उनके स्वागत के लिए फूलों की चित्रकला (सांझी) सजाकर स्वागत करती थी। तभी से ब्रज में सांझी कला की शुरुआत पड़ी।

क्या होता है GI Tag

सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर GI Tag क्या होता है, तो आपको बता दें कि यह भौगोलिक संकेत है, जिसका प्रयोग उन उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनकी एक विशेष भौगोलिक उत्पत्ति होती है। साथ ही उनके गुणों की प्रतिष्ठा भी होती है, जो कि उसके मूल कारण की वजह से है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक GI Tag वाली वस्तुएं मौजूद हैं।

कौन देता है GI Tag

भारत में साल 1999 में जीआई टैग को लेकर कानून बनाया गया था, जिसके बाद साल 2003 में इसे लेकर प्रक्रिया शुरू हुई और साल 2004 में पहला जीआई टैग दिया गया। भारत में यह टैग चेन्नई स्थित इंडियन ज्योग्राफिकल रजिस्ट्री द्वार दिया जाता है। जिस वस्तु को जीआई टैग मिलता है, उसे प्रत्येक 10 वर्ष में इसका नवीनीकरण कराना होता है।