मथुरा में भाजपा नेता की दबंगई : सील खुलवाने के नाम पर ₹1 करोड़ की ‘डील’, काम खुद हुआ तो बिल्डर को धमकाया
मथुरा । कान्हा की नगरी में एक रसूखदार युवा भाजपा नेता और बिल्डर के बीच ‘करोड़ों के खेल’ का भंडाफोड़ होने से हड़कंप मच गया है। मामला विकास प्राधिकरण की सील खुलवाने से जुड़ा है, जहाँ सत्ता की हनक दिखाकर सरकारी तंत्र को कठपुतली बनाने की कोशिश की गई। चर्चा है कि एक बंद पड़ी कॉलोनी को ‘आजाद’ कराने के लिए भाजपा नेता ने बिल्डर से 1 करोड़ रुपये का मोटा सौदा किया था, जिसमें से 10 लाख रुपये बतौर ‘बयाना’ (एडवांस) डकार लिए गए।
सूत्रों के मुताबिक, तय हुआ था कि नेताजी अपनी ‘ऊपर तक सेटिंग’ का इस्तेमाल कर कोर्ट से केस वापस कराएंगे और विकास प्राधिकरण से सील खुलवाएंगे। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब किस्मत से बिल्डर के पक्ष में कोर्ट ने केस खारिज कर दिया। मामला कानूनी रूप से अपने आप सुलझ गया, तो नेताजी को अपनी ‘कमीशन’ डूबती नजर आने लगी। बताया जा रहा है कि काम खुद-ब-खुद होने से नाराज भाजपा नेता ने रुपयों के लालच में खेल पलट दिया और उच्चाधिकारियों पर दबाव बनाकर कॉलोनी की सील खुलने से रुकवा दी।
जब बिल्डर ने अपना काम अटकते देखा और नेताजी से अपने एडवांस दिए हुए 10 लाख रुपये वापस मांगे, तो मामला पूरी तरह गर्मा गया। आरोप है कि पैसे वापस करने के बजाय बिल्डर को सत्ता का डर दिखाया जा रहा है। अब आर-पार की जंग छिड़ गई है। बिल्डर ने प्राधिकरण के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की फाइल तैयार कर ली है।
”शहर की राजनीति में इस ‘अदृश्य डील’ की चर्चाएं आम हैं। सत्ताधारी दल के नेता का नाम सामने आने के डर से संगठन के अंदर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।”प्रशासनिक मिलीभगत पर सवाल: इस प्रकरण ने मथुरा विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। क्या प्राधिकरण के अधिकारी किसी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं? जनता के बीच अब यही सवाल तैर रहा है कि आखिर विकास के नाम पर ‘वसूली भाई’ कब तक सक्रिय रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार जनपद में एक युवा भाजपा नेता और बिल्डर के बीच कथित तौर पर करोड़ों की डील का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि एक कॉलोनी की सील खुलवाने के नाम पर भाजपा नेता ने बिल्डर से एक करोड़ रुपये का ठेका लिया, जिसमें से 10 लाख रुपये एडवांस भी ले लिए गए।
बताया जा रहा है कि इस डील में कोर्ट से केस वापसी कराने और विकास प्राधिकरण से कॉलोनी की सील खुलवाने की बात तय हुई थी। इसी बीच बिल्डर के पक्ष में कोर्ट से केस खारिज हो गया, जिससे मामला स्वतः ही हल होने की स्थिति में पहुंच गया। सूत्रों के अनुसार मामला अपने आप सुलझता देख भाजपा नेता नाराज हो गए और उन्होंने उच्च अधिकारियों से बिल्डर की शिकायत कर दी। इसके बाद दबाव में आए प्राधिकरण अधिकारियों ने कॉलोनी की सील खोलने से इंकार कर दिया जिससे मामला और उलझ गया।
इधर बिल्डर ने प्राधिकरण के रवैये पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही उसने भाजपा नेता से अपने 10 लाख रुपये वापस मांगे हैं। बताया जा रहा है कि पैसे वापस मांगने पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इस पूरे प्रकरण ने शहर की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि मामले में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में बिल्डर जल्द कर सकता मीडिया के समक्ष कर सकता है भाजपा नेता के नाम का खुलासा।