मथुरा में एमपी-एमएलए अदालत ने पूर्व मंत्री सहित आधा दर्जन आरोपियों को किया बरी

मथुरा। 17 वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित उग्र आंदोलन मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे एमपी-एमएलए पंचम अदालत ने शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मंत्री सरदार सिंह सहित छह आरोपियों को बरी कर दिया है । इस मामले में शासन की ओर से हरेंद्र शर्मा एडवोकेट द्वारा पैरवी की गई । उन्होंने बताया कि राया थाना क्षेत्र में 17 वर्ष पूर्व बेमौसम वर्षा व ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और जौ की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई थी इसे लेकर किसानों ने आक्रोश शुरू किया था जो कई दिनों तक चला था। 22 मार्च 2007 को आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया था और सिग्नल तोड़कर ट्रेनें रोकी गई थीं। ट्रेनों पर पथराव किया गया। लोग राया स्टेशन पर ट्रेनों के आगे लेट गए थे। तत्कालीन जिलाधिकारी सहित प्रशासन का अमला मौके पर पहुंचा था। आक्रोशित लोगों ने पथराव कर दिया था।

आंदोलन में जिलाधिकारी सहित कई लोग चोटिल हुए थे। आंदोलन की प्रशासन ने वीडियो रिकार्डिंग कराई थी। पुलिस ने मुकदमे की लिखा पड़ी में पूर्व मंत्री सरदार सिंह के नेतृत्व में आंदोलन दिखाया । पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके 53 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने सुनवाई में 47 लोगों को पहले में ही बरी कर दिया था। ठोस सुबूत के अभाव में पूर्व मंत्री सरदार सिंह निवासी कारब राया सहित प्रहलाद निवासी बिसावली, छत्रपाल निवासी जासा, असलम खान उर्फ अस्सो निवासी मुहल्ला व्यापारियान, राजेंद्र सिंह निवासी तम्मका, रविंद्र उर्फ रवि निवासी मगदा मांट पर अदालत ने बरी कर दिया।