जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर सवाल , डॉक्टर पर कार्रवाई की संस्तुति

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में विरोधाभास, “गंभीर चोट” बताने पर उठे सवाल

मथुरा । जिला चिकित्सालय मथुरा से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एक प्रकरण में जांच समिति की रिपोर्ट और अल्ट्रासाउंड निष्कर्षों में गंभीर विरोधाभास पाया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और अनियमितताओं के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। पत्र के अनुसार, संबंधित मामले में घायल व्यक्ति के अल्ट्रासाउंड में सामान्य प्रकृति की स्थिति पाई गई थी, जिसे जांच समिति ने गंभीर श्रेणी में नहीं माना। इसके बावजूद बाद में दी गई सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में चोट को “गंभीर व जीवन के लिए खतरनाक” बताया गया जिस पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस केस को मजबूत करने के लिए फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराई गई। मामले में यह भी सामने आया कि सामान्य अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के बावजूद चोट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

जांच समिति ने पूरे प्रकरण की समीक्षा के बाद सिफारिश की है कि संबंधित अल्ट्रासाउंड की पुनः जांच किसी अन्य डॉक्टर या पैनल से कराई जाए। साथ ही जिला चिकित्सालय के सर्जन डा विकास मिश्रा और इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा. देवेन्द्र कुमार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय जिलाधिकारी स्तर पर लिया जाना है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नजरें टिकी हुई हैं। डिप्टी सीएम ने जिला चिकित्सालय, मथुरा में तैनात इमर्जेन्सी मेडिकल अफसर डॉ० देवेन्द्र कुमार एवं सर्जन डॉ० विकास मिश्रा द्वारा स्थानीय झगडे एवं मारपीट के मामले में 02 व्यक्तियों का मेडिकल किये जाने में लापरवाही बरतते हुए गलत मेडिकोलीगल किये जाने पर उक्त दोनो चिकित्साधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही किये जाने के आदेश दिये गये हैं।