मथुरा । जीरो टोलरेंस का दावा करने वाली योगी सरकार में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति किसी की मानी जाए तो वह है भाजपा के जनप्रतिनिधियों की जिनके सुझाव आग्रह है यहां तक कि फरियाद सरकारी अधिकारी सुनना तक नहीं चाहते कार्रवाई करने की बात तो बहुत दूर रही। एक बार नहीं 10 -10 बार विधायक अधिकारियों से मौखिक लिखित कार्रवाई की मांग कर थक चुके हैं। दबी जुबान में जनप्रतिनिधियों का कहना है कि क्षेत्र की जनता को कौन सा मुंह दिखाएं जनता कहती है तुम्हारी सरकार है फिर भी कोई काम नहीं होते । ऐसी स्थिति मथुरा की ही नहीं वरन पूरे राज्य की है।
मथुरा में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसमें मांट क्षेत्र के विधायक राजेश चौधरी ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि ग्राम प्रधान बिरजूगढ़ी पर भ्रष्टाचार के आरोप जांच कमेटी द्वारा सही पाए जाने के बावजूद चार महीने से पत्रावली आप के कार्यालय में विराज रही है जिस पर कोई कार्रवाई अभी तक आपके द्वारा नहीं की गई। सरकारी धन के गबन एवं भ्रष्टाचार से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रकरण को इस तरह लंबित रखना न्याय उचित नहीं है। भ्रष्टाचारी के विरुद्ध कार्रवाई न होने से सरकार की छवि खराब हो रही है।
बताया जाता है नौझील विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरजूगढ़ी के प्रधान के भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की काफी लंबे समय पूर्व शिकायत की गई थी जिसमें प्रधान पर अपने पिता के नाम पर सरकारी धन निकालने का गबन आदि के आरोप थे। शिकायत की जांच हेतु तत्कालीन जिलाधिकारी ने 28 अप्रैल 22 को जांच कमेटी गठित कर दी। जांच कमेटी ने लंबे समय तक एक-एक बिंदु पर बारीकी से गांव में जाकर जांच की जिसमें प्रधान दोषी पाए गए। प्रधान ने मनरेगा योजना का भी धन का दुरुपयोग किया था। बीती 22 नवंबर को जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी कार्यालय को भेज दी गई। इस मामले में चार माह बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर आज 10 मार्च को थक हारकर विधायक ने डीएम को पत्र लिखकर तत्काल कार्यवाही का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री के अलावा मुख्य सचिव तथा अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास को भी भेजी है।
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