वीआईपी संस्कृति के बहाने ही सही, निखरा तो हमारा ब्रज!

-आकाश नवरत्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का ब्रज दौरा न केवल आध्यात्मिक रूप से सफल रहा, बल्कि स्थानीय व्यवस्थाओं और स्वच्छता के लिए एक ‘गेम चेंजर’ भी साबित हुआ। अक्सर वीआईपी दौरों का सबसे सकारात्मक पक्ष यही होता है कि प्रशासन वह काम युद्धस्तर पर कर देता है जो सालों से लंबित होते हैं।
​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तीन दिवसीय ब्रज यात्रा केवल एक राजकीय दौरा नहीं बल्कि आस्था और आधुनिक विकास के मेल का प्रतिबिंब रही। 19 मार्च को रामलला की नगरी अयोध्या से सीधे कान्हा की नगरी मथुरा आगमन भारत की सांस्कृतिक अखंडता को दर्शाता है। गोवर्धन की सप्त कोशीय परिक्रमा कर उन्होंने न केवल अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की बल्कि ब्रज की परंपराओं का मान भी बढ़ाया।
​इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि रही वृंदावन के रामकृष्ण सेवाश्रम में आंकोलॉजी ब्लॉक (कैंसर विभाग) का उद्घाटन। यह इस बात का प्रमाण है कि ब्रज अब केवल तीर्थाटन का केंद्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी आत्मनिर्भर हो रहा है। महामहिम द्वारा योगी सरकार और जिला प्रशासन की पीठ थपथपाना इस बात की पुष्टि करता है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और नागरिक सुविधाओं को लेकर एक नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। दीदी माँ ऋतम्भरा जी के वात्सल्य ग्राम में तो राष्ट्रपति अभिभूत हो गयी।
​महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मथुरा दौरा संपन्न हो गया। शनिवार दोपहर जब सेना का हेलीकॉप्टर दिल्ली के लिए रवाना हुआ, तो पीछे एक चमचमाता और स्वच्छ गोवर्धन-वृंदवन छोड़ गया। प्रशासन ने जिस मुस्तैदी से गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की ‘दशकों पुरानी गंदगी’ को साफ किया और साज-सज्जा की, वह काबिले तारीफ तो है, पर एक सवाल भी छोड़ जाता है—क्या हमें व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए हमेशा किसी बड़े दौरे का इंतजार करना होगा?
​यह सुखद है कि राष्ट्रपति जी ने प्रशासन की प्रशंसा की, लेकिन असली प्रशंसा तब होगी जब यह स्वच्छता और व्यवस्था उनके जाने के बाद भी ‘स्थायी’ बनी रहे। ब्रजवासियों को वह अधिकार है कि उन्हें बिना किसी विशेष दौरे के भी वही साफ-सफाई मिले जो पिछले तीन दिनों में देखने को मिली। आंकोलॉजी ब्लॉक का उपहार और परिक्रमा मार्ग का कायाकल्प बताता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासन पहाड़ जैसा काम भी चंद दिनों में कर सकता है। अब चुनौती इस मानक को बनाए रखने की है।