1000 वर्षों बाद मथुरा में दर्शन देंगे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष

देशभर की यात्रा करते हुए 2 अप्रैल को गर्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे, श्रद्धालुओं में उत्साह

मथुरा। हजार वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के दौरान खंडित हुए भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष अब एक ऐतिहासिक यात्रा के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों से होते हुए मथुरा पहुंचने जा रहे हैं। यह अद्भुत और दुर्लभ अवसर 2 अप्रैल को मथुरा महानगर के गोविंद नगर स्थित प्रसिद्ध गर्तेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा।
आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी साध्वी कनकेश्वरी एवं साध्वी राधा रानी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के ये संरक्षित अवशेष तमिलनाडु, केरल, बिहार, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों की यात्रा पूरी करते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह पावन ज्योतिर्लिंग 2 अप्रैल को कानपुर से मथुरा लाया जाएगा।
मथुरा में इसे प्रातः 7:30 बजे से 10:00 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ गर्तेश्वर महादेव मंदिर में रखा जाएगा। इसके बाद यह पावन यात्रा वृंदावन, आगरा होते हुए मेरठ की ओर प्रस्थान करेगी।
कार्यक्रम के आयोजक आशीष कक्कड़ ने बताया कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय आस्था और इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मथुरा की धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन का पुण्य लाभ उठाएं।
मान्यता के अनुसार, इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव द्वारा की गई थी और इसकी विशेषता यह थी कि यह अपनी सतह से ऊपर स्थित रहता था। इतिहास में दर्ज है कि आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर इसे खंडित कर दिया था, जिसके बाद तत्कालीन पुजारी सीताराम अग्निहोत्री ने इसके अवशेषों को संरक्षित कर पूजा-अर्चना जारी रखी।
करीब एक सहस्राब्दी बाद इन अवशेषों का पुनः जन-जन के दर्शन के लिए निकलना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में नूपुर जैन, लोकेश गोस्वामी, जॉली अग्रवाल, अरनव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मथुरा में यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि इतिहास और परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी भी बनेगा।