मथुरा। जिला अस्पताल में फर्जी मेडिकल रिपोर्टों के सहारे निर्दोषों को फंसाने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। अब इस घोटाले में स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
एक ही मामले में अलग-अलग समय पर कराई गई मेडिकल जांचों में भारी विरोधाभास सामने आया जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। जांच में सामने आया कि मथुरा जिला अस्पताल फर्जी मेडिकल और रेफर सेंटर की तरह इस्तेमाल हो रहा था।
फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब डॉ. विकास मिश्रा द्वारा बनाई गई मेडिकल रिपोर्ट में सामान्य चोट को जानलेवा दर्शा दिया गया। चेतन नामक व्यक्ति की रिपोर्ट के जरिए दूसरे पक्ष को गंभीर धाराओं में फंसाने की साजिश रची गई। पीड़ित की शिकायत पर डीएम ने तुरंत जांच बैठा दी।
डीएम के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति एडीएम प्रशासन अमरेश कुमार एसपी क्राइम अवनीश कुमार मिश्र एसीएमओ प्रशासन डॉ. आलोक कुमार को शामिल किया गया उन्होंने न सिर्फ इस मामले, बल्कि पिछले 6 महीनों में मथुरा से आगरा रेफर किए गए 30 संदिग्ध मेडिको-लीगल मामलों की जांच की। 4 मामलों में मेडिकल और री-मेडिकल रिपोर्ट अलग-अलग पाई गईं और चोटों को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया।
जांच में साफ हो गया कि यह खेल केवल मथुरा तक सीमित नहीं बल्कि इसके तार आगरा तक फैले हैं। इसी कारण अब आगरा प्रशासन स्तर से भी जांच की सिफारिश की गई है।
25 अक्टूबर को राया थाने से आए एक घायल के मामले में भी अनधिकृत रूप से पूरक रिपोर्ट बनाकर सामान्य चोटों को जानलेवा दर्शाया गया था। सीएमओ की जांच समिति पहले ही इसे नियम विरुद्ध बता चुकी है। यह मामला आगरा मंडल के कमिश्नर शैलेन्द्र कुमार सिंह तक पहुंच चुका है। कमिश्नर ने डीएम मथुरा और डीएम आगरा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं दोषी चाहे डॉक्टर हो या अधिकारी, बख्शा नहीं जाएगा।
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