मथुरा–वृंदावन में बंदरों और आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, बृजवासी दहशत में

मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि की नगरी मथुरा और विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल वृंदावन में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक अब आम जनजीवन के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। शहर से लेकर कस्बों और मंदिर क्षेत्रों तक हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि लोग घरों से निकलने में भी डर महसूस करने लगे हैं। लगातार हो रहे हमलों से मासूम बच्चे, वृद्ध महिलाएं, बुजुर्ग और श्रद्धालु सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

सुबह-शाम निकलना हुआ मुश्किल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे और शाम को टहलने निकलने वाले बुजुर्ग सबसे आसान निशाना बन रहे हैं। आवारा कुत्ते झुंड बनाकर गली-मोहल्लों में दौड़ते हैं और अचानक हमला कर देते हैं। कई मामलों में लोगों को अस्पताल तक पहुंचना पड़ा है। वहीं बंदर घरों की छतों, बिजली के तारों और सड़कों पर बैठकर राहगीरों पर झपट्टा मार रहे हैं।

बच्चों और महिलाओं पर ज्यादा हमले

शहर के अलग-अलग इलाकों से मिल रही जानकारी के अनुसार बंदर और कुत्ते महिलाओं और बच्चों पर अधिक आक्रामक हो रहे हैं। वृद्ध महिलाओं से थैले और सामान छीनने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई बार डर के कारण लोग गिरकर घायल हो जाते हैं। अभिभावकों में बच्चों को अकेले बाहर भेजने को लेकर चिंता बढ़ गई है।

वृंदावन में श्रद्धालु सबसे ज्यादा परेशान

वृंदावन में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बंदरों के आतंक का सामना करना पड़ रहा है। मंदिरों, परिक्रमा मार्ग, बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन क्षेत्र और घाटों के आसपास बंदर श्रद्धालुओं से प्रसाद, मोबाइल फोन, चश्मा, पर्स और बैग छीनकर ले जाते हैं। कई बार सामान वापस पाने के लिए लोगों को बंदरों को पैसे या खाने का सामान देना पड़ता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह स्थिति आस्था के माहौल को बिगाड़ रही है और धार्मिक पर्यटन पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।

नगर निगम पर उठे सवाल

इतनी गंभीर समस्या के बावजूद नगर निगम और संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि केवल कागजी कार्रवाई और आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस अभियान नहीं चलाया जा रहा। कभी-कभार कुत्तों की नसबंदी या बंदरों को पकड़ने की बात जरूर होती है, लेकिन उसका असर दिखाई नहीं देता।

स्थायी समाधान की मांग

बृजवासियों ने मांग की है कि नगर निगम तत्काल विशेष अभियान चलाकर बंदरों और आवारा कुत्तों को पकड़े। साथ ही इनके पुनर्वास, नसबंदी और अन्य स्थायी उपाय किए जाएं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडलों और धार्मिक संस्थाओं ने भी प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। लोगों का कहना है कि आस्था की नगरी में भय का माहौल नहीं होना चाहिए और नागरिकों व श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।