हाजीपुर में मंगलवार की रात जन सुराज यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने लालू परिवार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लालू परिवार की वापसी से बिहार में जंगल राज लौट सकता है। प्रशांत किशोर ने लालू यादव और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। बिहार और बिहार के लोग लालू-राबड़ी के जंगलराज से परिचित हैं, लेकिन 90 के दशक में जंगलराज का मतलब केवल बूथ लूटना, लूट-हत्या, छेड़खानी या लालू यादव की बेटियों की शादी के लिए गाड़ियों के शोरूम से नई गाड़ी उठाई गई ऐ मैं नहीं, पटना हाईकोर्ट ने 1990 से 2005 तक बिहार में लालू-राबड़ी शासनकाल को “जंगलराज” की संज्ञा 1997 में दी थी.उस समय जमीन लूटना, गोली मरना, चोरी और गन्दी फिल्मों का रिलीज होना आम बात था नौकरी के लिए पैसा देना पड़ता था नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने अपने सराहनीय प्रयास से बिहार में जंगल राज को ख़त्म किया पहले दिन में ही डाका पड़ता था थाने वाले भी उसे पकड़ने में नाकाम रहते और छोटे व्यापारी को चंदा देना होता था अपहरण की कितनी घटना हुई शिक्षा का भी व्यापार हुआ इसलिए बिहार से जो लोग भी नौकरी की तलाश में दूसरे राज्य में जाते तो इंटरव्यू में उल्टा क्वेश्चन पूछ कर भगा दिया जाता, मैंने वहाँ से 1992 में 3 साल का बीएससी का कोर्स 5 साल यानी 1994 में पूरा किया और कई बार बिहार की डिग्री के कारण अच्छे अच्छे संस्थान में इंटरव्यू में फेल हुआ क्योंकि जब कमिटी डिग्री देखती तो उसे भरोसा ही होता की सही है एक बार एक मास्टर डिग्री के छात्र को किसी अनुसंधान संस्थान, इंदौर में रिटेन के बाद इंटरव्यू देना पड़ा तो बिहार का डिग्री सुन कर लालू यादव के बारे में सवाल पूछ दिया और उसके बाद फेल हो गया केवल एक डिग्री का इस्सू नहीं था बल्कि वहाँ के लोग से सच्चाई का विश्वास भी उठ गया था अतः मैंने देहरादून से जब 1साल का इलेक्ट्रॉनिक में एडवांस कोर्स किया तब जाकर कहीं अच्छे संस्थान में बहुत क्वेश्चन का ज़बाब देने के बाद नौकरी मिली ऐ बहुत ही शर्म की बात है कि एक अनपढ़ लड़का पैसा और राजनीति ताकत के बल पर नौकरी पा लेता और जो पढ़े लिखे थे उन्हें अपने ख़र्ज के लिए सुबह 6 बजे भोर से ही ट्यूशन पढ़ना पड़ता और रात में घर लौटता क्योंकि वहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं था इसलिए कहीं आने जाने में ही 2-3 घंटे लग जाते ऐ इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तो दीखता है पुल बने रोड बना और लोगों को बेहतर सुविधा मिली विपक्ष के बोलचाल से जैसे किसी को भी गाली देना मंच से उतार देना है आज भी जिस तरह इंडिया गठबंधन के बोलने की भाषा आ रही है उससे यही लगता है कि यदि गलती से भी इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो बिहार में फिर से गुंडाराज आ सकता है लेकिन मैं अभी तक ऐ समझ नहीं पा रहा हूँ माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उसका दो बार सरकार बनाने में साथ क्यों दिया और क्या संभावना है कि अगर त्रिशुंक बहुमत मिला तो क्या वो फिर से इंडिया गठबंधन में जा सकते हैं। हालांकि बिहार में मोदीजी को लोग विकास के लिए मानते हैं क्योंकि बिहार से जंगलराज के बाद गुजरात में जब नौकरी के लिए गए तो वहाँ का विकास देखा है .हाल ही में उप राष्ट्रपति धनकड़ जी का त्याग पत्र देना और उसके बाद उप राष्ट्रपति पी . राधाकृष्णनजी का बनना ऐ दिखाता है कि एनडीए अभी कमजोर नहीं है कुछ यू ट्यूबर पूर्व उप राष्ट्रपति के त्यागपत्र को ऐ बता रहें हैं कि वो कुछ उद्योगपति से मिलकर सरकार गिराने की कोशिश कर रहे थे और उद्योगपति ने इंडिया गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को नीतीश कुमार या चंद्राबाबूनायडू के नेतृत्व में प्रधानमंत्री बनाने को एकजुट होने को कहा और चंद्राबाबूनायडू को अपने राज्य में ही मुख्यमंत्री बनने की इक्छा जताई फिर नीतीश कुमार को कहा गया क्योंकि दोनों के गठबंधन से ही सरकार टिकी है और श्री नीतीश कुमार ने ये बात मोदीजी को बताई क्योंकि उन्हें मालूम था सरकार चलाना मुश्किल होगा अतः उन्होंने एनडीए के साथ ही रहने में अपनी भलाई समझी हालांकि मैं बिना जाने इसपर क़ोई भी टिप्पणी नहीं करूँगा लेकिन मोदीजी और नीतीश जी की जोड़ी बिहार में हिट हो रही है लेकिन अब कुछ नई पार्टी जैसे जनसुराज और अन्य छोटे दलों से भी वोट काटने की संभावना है। अतः बिहार का चुनाव में कांटे की टक्कर नजर आ रही है।