मथुरा। आशना का मतलब होता है- साथी। मैं महिलाओं की साथी हूं। किसी भी बालिका और महिला को डरने की जरूरत नहीं। अन्याय के खिलाफ जज्बे के साथ खड़ी हो जाए। जब भी आवश्यकता हो मुझे काॅल कर सकतीं हैं। मैं उनके सहयोग के लिए तत्पर हूं।
ये उद्गार नवागत नगर क्षेत्राधिकारी आईपीएस आशना चौधरी के थे। उन्होंने विशेष मुलाकात में बताया कि वह दो बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल रही। निराशा भी आई। ऐसा लगा जैसे कि सब कुछ छिन गया हो। लेकिन परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित किया। साहस बटोरा और तीसरे प्रयास में वह सफल हो सकीं। परिवार में वह सबसे बड़ी हैं उनका छोटा भाई है, जो व्यवसाय करता है।
प्राथमिकताओं के प्रश्न पर सुश्री आशना चौधरी ने बेबाकी से बताया कि आज तो उनका पहला दिन है। वह अपना कार्यक्षेत्र पहचान रहीं हैं। इसके बावजूद भी वह चाहेंगी उनका पूरा एरिया अपराध मुक्त हो। वह क्राइम पर रिव्यू कर रहीं हैं। साप्ताहिक बैठकें कर महिला एवं बच्चों के प्रति अपराधों पर पूर्णरूप से अंकुश लगाएंगी। शासन की मयमुक्त समाज को प्राथमिकता देने को संकल्पित हैं।
जनपद की छात्राओं को प्रेरित करते हुए सुश्री चौधरी ने कहा कि वह कठिन परिमश्र करें। मैं छोटी सी जगह से आईपीएस बन सकती हूं तो आप तो बड़े शहर में रहते हो। इंटरनेट का जमाना है, सब कुछ उस पर उपलब्ध है। असफलता भी सफलता की पहली सीढी हो सकती है। यदि आईपीएस न बनीं होतीं केच् लाइन को द्वितीय लक्ष्य बनाकर चल रही थी। खेलों में अभिरूचि रखने वाली सुश्री चौधरी पांच किमी की अच्छी धाविका हैं। नियमित रूप से व्यायाम करते रहने के बावजूद भी वह वेजेटेरियन हैं।
सुश्री आशना चौधरी 2023 बैच उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 28 अगस्त को 1998 को हापुड़ के पिलखुआ क़स्बा में हुआ है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम काॅलेज से अंग्रेजी साहित्य मे बीए आनर्स एवं साउथ एशियन यूनिवर्सिटी दिल्ली से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में एमए किया है। आशना ब्यूटी विद ब्रेन के रूप में जानी जाती है। उनके पिता प्रो.अजीत सिंह एक सरकारी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। माता गृहणी हैं।
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