श्री कृष्ण जन्मस्थान संस्थान विवाद गरमाया : सचिव कपिल शर्मा ने CM से की जांच की मांग , आरोप लगाने वाले पर भी साधा निशाना

1000 करोड़ की संपत्ति के आरोप को बताया निराधार, आरोपी समाजवादी पार्टी का रहा है कार्यकर्ता

मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर अपने ऊपर लगाए गए कथित आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उनकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाने वाले दिनेश फलाहारी उर्फ दिनेश कौशिक की मंशा और गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कपिल शर्मा ने कहा है कि उन पर 1000 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया है, जबकि उन्होंने संस्थान से कभी कोई वेतन, मानदेय या आर्थिक लाभ नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी चल-अचल संपत्तियों की जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

कपिल शर्मा ने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि दिनेश फलाहारी का पूर्व नाम दिनेश कौशिक है और उनका संबंध समाजवादी पार्टी से रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है और चुनाव लड़ने के प्रयास भी कर चुका है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दिनेश फलाहारी के विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं, जिनमें से कुछ मामलों में न्यायालय में कार्यवाही अभी भी लंबित है।

पत्र में कपिल शर्मा ने आरोप लगाया कि दिनेश फलाहारी लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को उछालकर प्रचार-प्रसार करते रहे हैं और चर्चाओं में बने रहने के लिए लगातार नए विवादास्पद विषय सामने लाते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से मिलते-जुलते नाम का ट्रस्ट बनाकर श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो गंभीर विषय है।
कपिल शर्मा ने यह आशंका भी जताई है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के पीछे राजनीतिक या अन्य स्वार्थ हो सकते हैं। उनका कहना है कि बिना किसी प्रमाण के लगाए गए आरोपों से न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, बल्कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी आहत करने का प्रयास किया गया है।
पत्र के अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की सक्षम एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भ्रम की स्थिति समाप्त हो।