मथुरा का विद्युत शवदाह गृह बना सेवा का मिसाल, मई में 47 शवों का निशुल्क अंतिम संस्कार
लावारिस शवों को भी मिला सम्मानजनक विदाई, पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मथुरा। ध्रुवघाट शमशान स्थल संचालन समिति द्वारा संचालित निशुल्क विद्युत एवं गैस शवदाह गृह में मई माह के दौरान सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। 1 मई से 31 मई तक कुल 47 शवों का पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें 44 लावारिस एवं 3 परिजनों द्वारा लाए गए शव शामिल रहे। सभी का संस्कार समिति द्वारा पूरी तरह निशुल्क किया गया।
समिति के विद्युत एवं गैस शवदाह गृह के संयोजक महेश अग्रवाल (साड़ी वालों) ने जानकारी देते हुए बताया कि अपेक्षा से अधिक संख्या में शवों का अंतिम संस्कार यहां किया गया। उन्होंने बताया कि सुविधा के दृष्टिगत दोनों भट्टियां सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं और बिजली, गैस व जनरेटर के माध्यम से यह सेवा निरंतर निशुल्क जारी है।
संचालन समिति के अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल एवं मंत्री उमेश अग्रवाल (एडवोकेट) ने आम नागरिकों से इस जनसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यहां पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ पंडित की उपस्थिति में अंतिम संस्कार की व्यवस्था यमुना तट स्थित शवदाह गृह में की गई है। साथ ही, शोक संतप्त परिजनों एवं उनके साथ आए लोगों के लिए वातानुकूलित हाल, शुद्ध पेयजल व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
समिति के संरक्षक धनेश मित्तल एवं शशिभानु गर्ग ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रांति में न पड़ें और अपने परिचितों के अंतिम संस्कार हेतु विद्युत शवदाह गृह का उपयोग करें। यह न केवल पूर्णतः निशुल्क है, बल्कि पेड़ों की कटाई रोककर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस जनकल्याणकारी सेवा के संचालन को और बेहतर बनाने के लिए समाज के लोगों से सुझाव आमंत्रित हैं, ताकि इसे और प्रभावी व उपयोगी बनाया जा सके।