मथुरा । ब्रजवासी सेवा समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय तुलसी-शालिग्राम विवाह महोत्सव में भक्ति, उल्लास और भावुकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मंगल गीत, हल्दी-मेहंदी, बारात और विवाह की सभी रस्में परंपरागत तरीके से संपन्न हुईं। बेटी की विदाई के भावुक क्षणों ने सभी की आंखें नम कर दीं।
महोत्सव के प्रथम दिन तुलसी जी के माता-पिता के रूप में कृष्ण गोपाल विसावर परिवार द्वारा लग्न पत्रिका लेकर आगमन किया गया, वहीं शालिग्राम जी के पक्ष से संदीप अग्रवाल परिवार ने अगवानी की। इसके बाद विधिवत लगुन, हल्दी व मेहंदी कार्यक्रम आयोजित हुए। महिला सदस्यों ने देर रात तक पारंपरिक गीतों पर उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
दूसरे दिन ठाकुर शालिग्राम जी की भव्य बारात निकाली गई, जिसमें मुंबई से आए बैंड की मधुर धुनों ने समां बांध दिया। नाथद्वारा से मंगाई गई विशेष फूलों की पालकी में सुसज्जित ठाकुर जी आकर्षण का केंद्र रहे। जनमासे में पहुंचने पर कन्या पक्ष ने बारात का जोरदार स्वागत किया और जयमाला की रस्म संपन्न हुई।
देश की प्रसिद्ध भागवत वक्ता कीर्ति किशोरी जी के मंगल गायन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देर रात पंडित शशांक पाठक व उनकी टीम द्वारा हवन व वैदिक रीति से विवाह संस्कार सम्पन्न कराया गया। कन्यादान में श्रद्धालुओं ने वस्त्र, आभूषण व अन्य उपहार अर्पित किए।
विदाई के समय का दृश्य अत्यंत भावुक रहा, मानो स्वयं ठाकुर जी बिटिया को विदा कर रहे हों। तारों की छांव में तुलसी जी की विदाई के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर विधायक ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, देवेंद्र शर्मा, भवन भूषण कमल, राकेश त्यागी, सुनील अग्रवाल, शशिभानु गर्ग, मुकेश अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, दीपक सुतिया, संदीप वर्मा, विनोद अग्रवाल, आशीष गर्ग, पंकज अग्रवाल, सचिन चौधरी, वेद प्रकाश अग्रवाल, धीरज अग्रवाल, अमित बंसल, मनीष अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, जुगल किशोर अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, राजीव वर्मा, नवल अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, सुरेंद्र शर्मा, योगेश अग्रवाल, कमल अग्रवाल, मिशन अग्रवाल, कन्हैया अग्रवाल, अंकित मित्तल, सुधीर वर्मा, संजय, सौरभ, गिरधारी अग्रवाल, मोहन वर्मा, विशाल अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, समीक्षा अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, अतुल मित्तल, केदार खंडेलवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम स्थल को कर्नाटक शैली में सजाया गया था जबकि नाथद्वारा के कारीगरों द्वारा पालकी व छप्पन भोग की विशेष व्यवस्था की गई।