धर्मनगरी में खाकी का ‘कमीशन खेल’: रिश्वत न मिलने पर दरोगा को आया गुस्सा, गरीब की टिर्री की सीज

​मथुरा । धर्मनगरी के हृदय स्थल ‘होली गेट’ पर तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यशैली एक बार फिर दागदार हुई है। यहाँ ईमानदारी के मुखौटे के पीछे भ्रष्टाचार का ऐसा खेल चल रहा है, जिसने न केवल खाकी को शर्मसार किया है, बल्कि योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को भी खुली चुनौती दे दी है।

ताजा मामला एक गरीब ई-रिक्शा (टिर्री) चालक से जुड़ा है। आरोप है कि चेकिंग के नाम पर रोके गए चालक से पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ने के बदले ₹1500 की अवैध मांग की। जब चालक ने अपनी माली हालत का हवाला देते हुए पैसे देने में असमर्थता जताई, तो पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आ गया। हद तो तब हो गई जब मौके पर मौजूद मीडियाकर्मी ने इस वसूली पर सवाल किया। अपनी पोल खुलती देख दरोगा जी ने बड़ी ही चतुराई से सारा ठीकरा सिपाहियों पर फोड़ दिया और कहा, “मैं तो ईमानदार हूँ, पैसे सिपाही ने मांगे होंगे।”

मामला सुलझने के बजाय तब और बिगड़ गया जब मीडिया के हस्तक्षेप से झुंझलाए दरोगा ने न्याय करने के बजाय प्रतिशोध का रास्ता चुना। देखते ही देखते रिश्वत की ‘डिमांड’ ₹1500 से बढ़ाकर ₹2500 कर दी गई। जब गरीब चालक इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा पाया, तो दरोगा ने अपनी सत्ता का धौंस दिखाते हुए उसकी रोजी-रोटी यानी टिर्री को सीज कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय पुलिस ने कई अन्य वाहन भी पकड़े थे, जिन्हें कथित तौर पर तय ‘सुविधा शुल्क’ लेकर छोड़ दिया गया। लेकिन इस मामले में रिश्वत न मिलने की खीझ गरीब पर कार्रवाई कर निकाली गई।

​अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मथुरा के उच्चाधिकारी इस मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेंगे? क्या उन पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी जो वर्दी की आड़ में आम जनता का भरोसा तोड़ रहे हैं, या फिर होली गेट पर भ्रष्टाचार का यह ‘गेट’ यूँ ही खुला रहेगा?