मथुरा में 24 साल बाद ध्रुवघाट विद्युत शवदाह गृह चालू, 3.25 करोड़ की परियोजना का सफल ट्रायल, चार शवों का हुआ अंतिम संस्कार

मथुरा। धर्मनगरी मथुरा के ध्रुवघाट पर वर्षों से अधूरी पड़ी परियोजना आखिरकार हकीकत बन गई। 24 साल के लंबे इंतजार के बाद नवनिर्मित विद्युत शवदाह गृह का शनिवार को सफल परीक्षण किया गया। गैस और बिजली से संचालित भट्ठियों पर चार शवों का अंतिम संस्कार कर परियोजना की तकनीकी क्षमता को परखा गया।

करीब 3.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक शवदाह गृह में प्रत्येक शवदाह में 45 मिनट से एक घंटे का समय लगा, जिससे स्पष्ट हो गया कि यह सुविधा अब पूरी तरह संचालन के लिए तैयार है।
यह परियोजना वर्ष 1990-96 के बीच शुरू हुई थी, लेकिन धन की कमी के चलते 1996 में ठप पड़ गई और करीब ढाई दशक तक फाइलों में दबी रही। जून 2020 में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने इसे दोबारा जीवित किया। लंबे समय तक पड़े रहने से जर्जर हो चुके ढांचे की एएमयू से स्ट्रक्चरल जांच कराई गई, जिसके बाद असुरक्षित हिस्से गिराकर नए डिजाइन पर पुनर्निर्माण किया गया।

1675 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बने इस शवदाह गृह में आधुनिक सुविधाओं का पूरा खाका है—
बेसमेंट में ऑपरेटर कक्ष, अस्थि कलश अलमारी और गैस सिलेंडर एरिया, जबकि भूतल पर कार्यालय, पुरुष-महिला प्रतीक्षालय, शौचालय, इलेक्ट्रिक व गैस फर्नेस, पार्किंग और चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाई गई है। अकेले सिविल कार्य पर ही 191.99 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
परीक्षण के दौरान ध्रुवघाट संचालन समिति के संरक्षक गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, मंत्री उमेश अग्रवाल, धनेश मित्तल, महेश अग्रवाल और एमवीडीए के अवर अभियंता विमल कोहली मौजूद रहे। संरक्षक गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने परीक्षण को पूरी तरह सफल बताया।
उन्होंने जानकारी दी कि एमवीडीए, नगर निगम और ध्रुवघाट संचालन समिति के बीच हस्तांतरण अनुबंध के बाद शवदाह गृह का संचालन शीघ्र ही समिति द्वारा शुरू किया जाएगा। संचालन की जिम्मेदारी महेश अग्रवाल को संयोजक बनाकर सौंपी गई है।
ध्रुवघाट पर यह विद्युत शवदाह गृह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि मथुरा शहर के लिए आधुनिक, सम्मानजनक और व्यवस्थित अंतिम संस्कार सुविधा भी साबित होगा।