मथुरा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की चर्चा तेज होने के बीच एक बार पुनः विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि वह पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए एक तरफा आर एफ पी डॉक्यूमेंट को निरस्त कर दें। इस बीच निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 311 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से पुनः अनुरोध किया है कि वे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से बिजली कर्मियों को होने वाले नुकसान के विषय में बिजली कर्मियों का पक्ष रखने के लिए संघर्ष समिति को वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजली के क्षेत्र में बिजली कर्मी और बिजली के उपभोक्ता सबसे बड़े स्टेक होल्डर है। ऐसे में निजीकरण के पहले बिजली कर्मियों और बिजली के उपभोक्ताओं का पक्ष सुने बिना निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 16500 नियमित कर्मचारियों और 60000 संविदा कर्मचारियों की नौकरियों के समाप्त होने का खतरा है। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर अभियंताओं जूनियर इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों को रिवर्शन का सामना करना पड़ेगा। निजीकरण कर्मचारियों का भविष्य अंधेरे में डाल देने वाला है। निजीकरण का प्रस्ताव हर हाल में निरस्त किया जाना चाहिए।
मथुरा में सभी खण्ड कार्यालय के सामने निजीकरण के विरोध में नारेबाजी की गई और प्रतिदिन अब निजीकरण के विरोध में चिंतन मंथन करते हुए इसके नुकसान के बारे में कर्मचारियों और आम जन के बीच वार्ता की जाएगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे हैं आंदोलन के 311 वें दिन बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
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