मथुरा के कई क्षेत्र यमुना जल से हुए बाढ़ ग्रस्त , महावन का एक गाँव बना टापू

मथुरा। पहाड़ों पर हो रही निरंतर बारिश के चलते हथिनी कुंड से लगातार भारी मात्रा में यमुना नदी में जल छोड़े जाने के कारण जनपद में बाढ़ की स्थिति बनती जा रही है। नौहझील और महावन, बल्देव क्षेत्र के कई गांव जल मग्न हुए हैं। जिला अधिकारी के निर्देश के चलते फौरी तौर पर राजस्व विभाग की टीमों ने आम नागरिकों की सुरक्षा के इंतजामों के लिए कमर कस ली है।
रविवार को जिलाधिकारी सीपी सिंह एडीएम वित्त पंकज कुमार वर्मा, एसडीएम कंचन गुप्ता, सीओ संजीव राय, तहसीलदार अमित त्रिपाठी, नायब तहसीलदार प्रद्युम्न त्रिपाठी, साविका शर्मा और थानाध्यक्ष रंजना सचान के साथ महावन तहसील के गांव नगला अकोश में पहुंचे वहां उन्होंने यमुना नदी के बढ़ते जल प्रवाह को लेकर एसडीम को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान रालोद नेता रामवीर सिंह भरंगर आदि क्षेत्रीय नागरिकों ने उनको बाढ़ से निपटने को लेकर सुझाव भी दिए। वर्तमान में नगला कोस में भारी मात्रा में यमुना जल आ जाने से गांव टापू सा बन गया है। इस समय महावन तहसील में इस गांव के अलावा कई गांव यमुना के बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिलाधिकारी ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। जिला अधिकारी ने स्कूली बच्चों के लिए कच्चा रास्ता बनाने की बात कही। इसके बाद डीएम ने वृन्दावन के केसी घाट पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वृंदावन की कई कॉलोनी भी जल मग्न हो गयी है।
बलदेव में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से बलदेव देहात क्षेत्र के सीमावर्ती गांव नगला हगा, अकोस समेत 4-5 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इससे लगभग 2500 से 3000 की आबादी प्रभावित हो रही है। गांवों के आने-जाने के रास्ते बंद हो गए हैं। चारों तरफ पानी फैल जाने से लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। बाढ़ चौकी पर न तो कोई कर्मचारी मौजूद है और न ही मेडिकल सुविधा उपलब्ध है। अधिकारियों ने तुरंत एक स्टीमर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इससे गांवों में फंसे लोगों को निकाला जा सकेगा और आवागमन बहाल रहेगा।
लगातार बढ़ते जलस्तर से नौहझील क्षेत्र के कई गांवों में पानी पूरी तरह घुस गया। 24 से ज्यादा गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। अधिकारियों ने अति संवेदनशील तीन गांवों को खाली कराने को कहा है, लेकिन ग्रामीण यहां से जाने से मना कर रहे हैं। नौहझील-छाता मार्ग पर पांच-पांच फीट पानी बहने लगा है। राहगीर पानी में से होकर गुजर रहे हैं। यमुना किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। वृंदावन और शेरगढ़ के कुछ क्षेत्रों का भी यही हाल है।

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सुरीर, नौहझील, मथुरा शहर, वृंदावन, महावन, बलदेव आते हैं। इन क्षेत्रों के दर्जनों गांव व कॉलोनियां यमुना के किनारे बसी हैं, जहां बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गंतव्य तक जाने के लिए राहगीरों को पानी से होकर गुजरना पड़ा।
पुलिस ने मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग करके बंद कर दिया। शेरगढ़ क्षेत्र का भी यही हाल रहा। यमुना से सटे गांवों में पानी पहुंच गया। इससे किसानों की धड़कनें बढ़ गई हैं। आने-जाने वाले मार्ग भी अवरुद्ध हो गए हैं। ताजेवाला से आ रहे पानी को गोकुल बैराज के गेट खोलकर लगातार छोड़े जाने से यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 164.80 से बढ़कर 165.36 मीटर तक पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु 165.200 मीटर से महज कुछ ही कम है।
बाढ़ जैसे हालात बनने के बाद प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए। उन्होंने शनिवार रात तक नौहझील क्षेत्र के अड्डा मीणा, छिनपारई और फिरोजपुर गांव के लोगों से घर खाली करने को कहा, लेकिन गांव वाले अपनी जिद पर अड़ गए। उन्होंने गांव खाली करने से मना कर दिया। इसके अलावा प्रभावित गावों में अड्डा मल्हान, अड्डा जाटव, बाघर्रा, बरौठ, मंडारी, रायपुर, नानकपुर, भैरई, मुसमुना, मुकदुमपुर, खुशलागढ़ी, अनरदागढ़ी, भगवान गढ़ी, तिलका गढ़ी, जाफरपुर, मंगलखोर, इनायतगढ़, दौलतपुर, बसाऊ, देदना, मरहला मुक्खा, भूरगढ़ी, पालखेड़ा, पिथौरा व फरीदपुर सहित आदि गांव शामिल हैं। यदि यमुना में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाता है तो जिले के गांव धौरेरा, अहिल्यागं, जयसिंपुरा, मथुरा बांगर, मथुरा खादर, माधौपुर खादर, दामोदरपुरा, औरंगाबाद, रौंची कोयला अलीपुर, करनावल, आमला सुल्तानपुर, गढ़ाया लतीफपुर, गौरा नगर कॉलोनी, वृंदावन खादर, राजपुर, खादर वहीं छाता तहसील में बाबूगढ़ और चमरगढ़ी गांव में बाढ़ जैसे हालात हो जायेगें। इसके अलावा मांट व महावन तहसील के भी दर्जनों गांव शामिल हैं। डीएम सीपी सिंह ने बताया यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुये मथुरा-वृंदावन- 09, छाता-11, मांट-07, महावन-05, गोवर्धन-02 स्थानों पर बाढ़ चौकियां बनाई गईं हैं। इसके अलावा सभी प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। 24 घंटे के अंदर यमुना नदी से जल घटना शुरू हो जायेगा। खतरे की कोई बात नही है। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिये सभी इंतजामत किये गये।