श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ईदगाह के अवैध कब्जे को लेकर कोर्ट में नया केस किया दायर , 1974 में हुए समझौते को निरस्त करने की मांग

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट ने शुक्रवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय में कमेटी ऑफ मैनेजमेंट शाही ईदगाह के खिलाफ नया वाद दाखिल किया है। उसमें कहा गया है कि 1974 में हुआ समझौता गैर कानूनी है, ट्रस्ट की उस समझौते से कोई सहमति नहीं है। इस जमीन का असली मालिक जन्मभूमि ट्रस्ट है।
इस संबंध में अधिवक्ता महेश चतुर्वेदी ने बताया कि हमने कोर्ट से मांग की है कि समझौते को खारिज किया जाये, हमारी जमीन पर अनाधिकृत निर्माण कब्जा हटाया जाये। उन्होंने बताया कि पांच हजार वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था जब से यह भूमि कटरा केशवदेव के नाम से जानी जाती है। करीब 16 एकड इस भूमि को ब्रिटिश काल में नजूल की भूमि घोषित कर दिया गया जिसे नीलामी में वाराणसी के राजा पटनीमल ने क्रय किया था और इस जमीन को लेकर एक ट्रस्ट बनाया गया।
न्यायालय में मौजूद हिन्दू वादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि आज ठा. बालकृष्ण केशव देव की ओर से न्यायालय में दावा दाखिल किया गया है। आज भी ट्रस्ट की जमीन पर बनी ईदगाह मस्जिद के आस-पास बने मकान आदि का टैक्स जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा ही दिया जाता है। खसरा खेवट खतौनी आदि में सदैव से जन्मभूमि ट्रस्ट मालिक है। 137 साल से इस मामले में मुकदमे चले। एक भी जजमैंट ऐसा नहीं है जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को मालिक नहीं माना गया हो ।
हिन्दू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय हरियाणा ने बताया कि ठा. बालकृष्ण केशव देव जी के ट्रस्टियों द्वारा आज जो दावा दायर किया है वह प्रशंसनीय है। दावे में ईदगाह के अवैध कब्जे को खाली करने तथा पूर्व में श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ द्वारा किये गये राजीनामा को निरस्त करने की मांग की गई है। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय कोर्ट इस दावा को हाईकोर्ट इलाहाबाद स्थानांतरित करेगी क्योंकि सभी मुकदमों की सुनवाई वही की जा रही है।