जेल की सलाखों के पीछे रोशनी का हुनर सीख रहे बंदी, दीपावली पर बनाएंगे खुशियों के दीप
जिला कारागार में 20 बंदियों को दिया गया मोमबत्ती, दीपक और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां सजाने का प्रशिक्षण, हुनर के जरिए अपराध की दुनिया छोड़ने की मिल रही प्रेरणा
मथुरा । दीपावली का पर्व केवल घरों को रोशन करने का त्योहार नहीं है बल्कि जीवन में नई उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी देता है। इसी भावना को साकार करने के लिए जिला कारागार मथुरा में इस बार दीपावली की तैयारियां कुछ अलग अंदाज में की जा रही हैं। यहां बंदियों के हाथों से तैयार हो रही मोमबत्तियां, दीपक और भगवान लक्ष्मी-गणेश की सजी हुई मूर्तियां न केवल त्योहार की रौनक बढ़ा रही हैं बल्कि बंदियों के जीवन में बदलाव की नई रोशनी भी जगा रही हैं।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग के निर्देशानुसार दीपावली पर्व को लेकर जिला कारागार में कई दिन पहले से ही विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। इसके तहत 20 बंदियों को मोमबत्ती बनाने, दीपक तैयार करने तथा भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को आकर्षक ढंग से सजाने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बंदी स्वयं अपने हाथों से विभिन्न प्रकार की मोमबत्तियां, दीपक और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। उनके द्वारा किए जा रहे इस रचनात्मक कार्य में उत्साह और लगन साफ दिखाई दे रही है।
कारागार प्रशासन की ओर से दीपावली के मद्देनजर पूरे परिसर में विशेष साफ-सफाई भी कराई गई है। कारागार के प्रत्येक स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के साथ ही त्योहार का माहौल तैयार किया गया है। बंदियों को भी इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। इससे कारागार के भीतर दीपावली को लेकर उत्साह और उल्लास का वातावरण दिखाई दे रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल दीपावली की तैयारियों तक सीमित नहीं है बल्कि बंदियों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को निखारना और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदी नए हुनर सीख रहे हैं जो भविष्य में उनके लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकते हैं। कारागार में रहते हुए सीखे गए ये हुनर उन्हें बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इस रचनात्मक गतिविधि का बंदियों पर सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। उनके भीतर उत्साह के साथ कुछ नया सीखने और बेहतर जीवन की ओर बढ़ने की भावना विकसित हो रही है। कारागार प्रशासन की यह पहल बंदियों को यह संदेश दे रही है कि जीवन में गलती के बाद भी सुधार और नई शुरुआत का रास्ता हमेशा खुला रहता है।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग के निर्देशन में की जा रही यह पहल बंदियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि यहां सीखा गया हुनर बंदियों को कारागार से बाहर निकलने के बाद अपराध की दुनिया से दूर रहकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और एक बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा देगा।