मथुरा में सपा में महानगर अध्यक्ष की कुर्सी पर 24 घंटे में पलटा फैसला, नियुक्ति के बाद निरस्तीकरण से मची खलबली
भारत भूषण एडवोकेट को महानगर अध्यक्ष बनाने के पत्र के बाद पुराने नेताओं ने खोला मोर्चा, राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचा विरोध; निजी सचिव ने जारी किया नियुक्ति निरस्त करने का पत्र
मथुरा। समाजवादी पार्टी में मथुरा-वृंदावन महानगर अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर ही घमासान छिड़ गया है। महानगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पहले जारी हुआ पत्र और फिर अचानक नियुक्ति निरस्त किए जाने के फैसले ने जिले की सियासत में हलचल मचा दी है। महज एक-दो दिन के भीतर बदले घटनाक्रम ने सपा की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है। सोशल मीडिया पर पहले नियुक्ति का पत्र वायरल हुआ और अब उसे निरस्त करने का पत्र तेजी से प्रसारित हो रहा है।
दरअसल कुछ दिन पूर्व समाजवादी पार्टी ने भारत भूषण एडवोकेट को मथुरा-वृंदावन महानगर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने संबंधी पत्र जारी किया था। यह पत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव गंगाराम की ओर से जारी किया गया था। नियुक्ति की खबर सोशल मीडिया पर प्रसारित होते ही पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। नियुक्ति को लेकर पार्टी के एक धड़े में नाराजगी सामने आने लगी।
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत भूषण और पार्टी कार्यकर्ता राघवेंद्र ठाकुर को कुछ समय पहले ही समाजवादी पार्टी से निष्कासित किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में भारत भूषण को दोबारा महानगर अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने पर पार्टी के पुराने नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया के माध्यम से नियुक्ति की जानकारी मिलने के बाद विरोधी खेमे के नेताओं ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी और राष्ट्रीय नेतृत्व तक अपनी आपत्तियां तथा तथ्य पहुंचाए।
चर्चा यह भी है कि हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए नेता डॉ. अशोक अग्रवाल की पहल पर भारत भूषण की नियुक्ति कराई गई थी। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति की जानकारी मिलने के बाद पार्टी के पुराने नेता प्रदीप चौधरी सहित अन्य नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने संगठन में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई।
लगातार बढ़ते विरोध और स्थानीय स्तर पर हुई लामबंदी के बाद शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजी सचिव गंगाराम की ओर से भारत भूषण की नियुक्ति निरस्त किए जाने का पत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद सपा की स्थानीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई। गुरुवार तक जिस पत्र को भारत भूषण की ताजपोशी के रूप में प्रचारित किया जा रहा था वही शुक्रवार को निरस्तीकरण के पत्र के चलते चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के लिए संगठन को मजबूत करना और नेताओं के बीच आपसी तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसे समय में महानगर अध्यक्ष की नियुक्ति और फिर उसे निरस्त किए जाने से पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। यदि स्थानीय नेताओं के बीच इसी तरह गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई जारी रही तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल महानगर अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मथुरा-वृंदावन महानगर की कमान अब किस नेता को सौंपी जाएगी और पार्टी नेतृत्व स्थानीय नेताओं के बीच बढ़ती खाई को किस तरह पाटेगा।