51 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ में गूंजा विश्व शांति का संदेश
संत विज्ञान देव जी महाराज ने कहा—मन को साधिए, जीवन स्वयं सरल हो जाएगा; वाराणसी में 14-15 दिसंबर को होगा 25 हजार कुंडीय महायज्ञ
मथुरा। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा स्थित हनुमान वाटिका में 51 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ एवं जय स्वर्वेद कथा का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञाग्नि में आहुतियां अर्पित कर विश्व शांति, मानव कल्याण और पर्यावरण संरक्षण की कामना की। इस अवसर पर संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने ध्यान, साधना और आत्मज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तविक शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के शांत, निर्मल और जागृत अंतःकरण में निवास करती है।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। जब ध्यान और साधना के माध्यम से चेतना जागृत होती है तथा अंतःकरण निर्मल बनता है, तब विचारों में शुद्धता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और कर्मों में सेवाभाव स्वतः प्रकट होने लगता है। उन्होंने कहा कि जीवन में स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।
संत प्रवर ने कहा, “मन को साधिए, जीवन स्वयं सरल हो जाएगा। बाहर की लड़ाइयां भीतर की हार से जन्म लेती हैं।” उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर और स्वयं को जानने का प्रयास करके जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकता है। आज समाज और विश्व में दिखाई देने वाली अशांति के पीछे आंतरिक शांति का अभाव भी एक प्रमुख कारण है।
कार्यक्रम के दौरान 51 कुंडीय हवन-यज्ञ में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञ के दौरान पूरा हनुमान वाटिका परिसर मंत्रों और जयघोष से गुंजायमान रहा।
आयोजकों ने बताया कि विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव, समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव और 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश एवं संकल्प यात्रा का शुभारंभ 18 जुलाई 2026 को कन्याकुमारी से किया गया था। यह यात्रा देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में पहुंचकर ध्यान-साधना, आध्यात्मिक जागरण तथा स्वर्वेद के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।
इसी अभियान के अंतर्गत मथुरा में आयोजित 51 कुंडीय हवन-यज्ञ एवं जय स्वर्वेद कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आगामी 14 और 15 दिसंबर 2026 को वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर के पावन परिसर में आयोजित होने वाले 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ एवं समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मथुरा एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक, गुरु भाई-बहन और गणमान्यजन उपस्थित रहे।