जीवन में सफलता के गुर

पृथ्वी पर शायद ही कोई ऐसा प्राणी हो जो कामयाब नहीं होना चाहता। हर व्यक्ति चाहता है कि उसे निरन्तर सफलता प्राप्त हो। उसे सुख-समृध्दि मिलती रहे। बुलंदियों पर उसका नाम रहे। पराजय व असफलता उसके पास न फटके, किन्तु यह संभव नहीं है। बावजूद इसके, व्यक्ति चाहे जिस क्षेत्र का हो, जिस वर्ग का हो, जिस वर्ग का हो, अपना प्रयास जारी रखता है। हम भी आज से ही प्रयास करें और कामयाब लोगों की फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज करायें।

सफलता-असफलता, जय-पराजय, सुख-दुःख, आशा-निराशा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में धूप-छांव की भांति आती है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसे निरन्तर सफलता प्राप्त हो, सुख मिलता रहे, आशा कायम रहे व पराजय का मुख नहीं देखना पड़े, किन्तु यह संभव नहीं है, हर व्यक्ति के जीवन में सभी प्रसंग आते हैं और चले जाते हैं। यदि हम प्रयास करें, मेहनत करें, व्यस्त रहें, आशावादी दृष्टिकोण रखें, समय का पूरा उपयोग करें, प्रसन्न रहें, हर स्थिति के लिए तैयार रहें तो हम जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की ओर अग्रसर होते रहेंगे व तनाव रहित रहेंगे, परिणामस्वरूप हम कई बीमारियों से स्वयं को बचा पाने में सफल हो सकेंगे।

समय की कद्र करें:- समय अमूल्य है, बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता है, अतः वर्तमान पर पूर्ण विश्वास रखकर, एक-एक क्षण का उपयोग करें, हर कार्य को योजनाबध्द तरीके से करें। अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित व नियमित रखें। समय-चक्र के अनुसार काम करने पर हम बहुत सारे कार्यों को कुछ ही समय में सम्पन्न करने में कामयाब हो सकेंगे। हमें दिनभर में क्या-क्या करना है, इन बातों के प्वाइंट हम कार्य शुरू करने के पूर्व ही एक पेपर पर बना लें। ज्यों-ज्यों कार्य करते जाएं, उस पर चिह्न अंकित करते जाएं, इससे हमें यह अहसास होगा कि हमने दिनभर में कितने प्रतिशत कार्य किया है, ताकि हम आगामी दिन, अधिक उत्साह व परिश्रम के साथ कार्य करने में स्वयं को तैयार रख सकेंगे। कई बार कार्य की अधिकता होने पर हम घबरा जाते हैं, कभी-कभी विवेकशून्य भी हो जाते हैं, तनावग्रस्त होकर चिंता करने लगते हैं, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि कार्य की अधिकता नहीं बल्कि कार्य की अनियमितता के कारण ऐसा होता है। अतः कार्य की अधिकता होने पर उसकी प्राथमिकता व महत्ता के आधार पर उसे करते जाएं। बहुत ज्यादा आवश्यक कार्य नहीं होने पर उसे कुछ घंटे या आगामी दिवस के लिये टाल दिया जाना चाहिए।

हर स्थिति में सदैव प्रसन्न रहना चाहिए, चाहे हम कितने ही व्यस्त या तनावग्रस्त हों। कार्य की अधिकता हो या किसी वस्तु का अभाव हो, व्यर्थ ही झंझलाहट व परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। जो कुछ हमें मिला है, उसे स्वीकार करें और अपने स्तर पर प्रयत्नशील रहें। किसी भी व्यक्ति से मिले, तो प्रसन्नतापूर्वक मिलें। कोई आगंतुक आया है तो एक हल्की सी मुस्कराहट के साथ उसका स्वागत करें, अपनी हल्की सी मुस्कराहट, आगंतुक व्यक्ति पर अमिट छाप अंकित कर देगी।

पहला सुख निरोगी काया:- अपने श्रम तथा समय को अपने लक्ष्य प्राप्त तक ही व्यय न करें। व्यर्थ की गपशप, किसी भी आलोचना में अपना समय व्यय नहीं करें, अपितु अपने कार्य से निवृत्त होने के पश्चात् समाचार-पत्र, अच्छी पत्रिकाएं पढ़ना चाहिए। व्यस्तता के साथ-साथ अवकाश के समय, अपना कुछ समय मनोरंजन के लिये भी निकालें ताकि हम स्वयं को तरोताजा महसूस कर सकें।

‘पहला सुख निरोगी काया है।’ हर श्रेष्ठ वस्तु की प्राप्ति के लिए सतत् व अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है, किन्तु श्रेष्ठतम वस्तु की प्राप्ति के लिए स्वयं का अर्थात् शरीर का पूरा ध्यान रखा जान चाहिए। नियमित समय पर भोजन, पौष्टिक आहार इत्यादि के साथ-साथ, पर्याप्त मात्रा मंन छह-सात घंटे गहरी नींद अवश्य लेनी चाहिए। नींद के अभाव में मनुष्य चिढ़चिढ़ा हो जाता है। नियमित व्यायाम और सुबह-शाम पैदल घूमना आवश्यक है। गर्मी के दिनों में, दिन के समय, आराम किया जाना चाहिए। अपने साथ-साथ, बच्चों के स्वास्थ्य, उनकी पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

मानसिक तनाव आधुनिक युग की देन है, हर छोटी-छोटी बात पर तनावग्रस्त हो जाना अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। अतः तनाव से बचने का प्रयास करें। हर समस्या का समाधान हो सकता है। जिन्दगी का मजा तकलीफों से लड़कर, विजय प्राप्त करने में है। अतः तकलीफों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका हमें स्वागत करना चाहिए।

लगातार असफलता, पारिवारिक भेदभाव, वैमनस्यता, कटुता इत्यादि से हीन-भावना पनपने लगती है, जो हमारे स्वस्थ व सफल जीवन को नुकसान पहुंचा सकती है।, अतः हीन-भावना को पनपने न दें क्योंकि सफलता-असफलता, जय-पराजय, उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख, आशा निराशा तो जीवन के अविभाज्य अंग है। हमें हर प्रतिकूल स्थिति का भी बहुत धैर्यतापूर्वक, दृढ़तापूर्वक मुकाबला करना चाहिए। यह सही है कि हर व्यक्ति, हर क्षेत्र में सफल नहीं हो सकता है, फिर भी अपनी असफलताओं के कारणों को खोजें, आत्मविश्वास बनाए रखें और अशपलकताओं को दूर करने हेतु अपने स्तर पर प्रयास करते रहें।

उठों जागो, स्वयं जागो तथा दूसरों को भी जगाओ। मृत्यु से पहले जीवन का भरपूर आनन्द लो। उठो जागो और तब रूको नहीं जब तक आपको अपने लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये। वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह प्रमाणित हो चुका है हमारे विचारों और मानसिक दृष्टिकोणों का हमारे भौतिक शरीर की अवस्था पर ही नहीं बल्कि हमारे सुख-चेन प्रसन्नता, कार्यकुशलता, सृजनशीलता और उत्पादकता तक पर प्रभाव पड़ता है।

समाज प्रिय बनें:- मद्यपन, धूम्रपान, जुआ इत्यादि बुरी आदतों से सदैव दूर रहें। ये आदतें हमें आर्थिक रूप से तो कमजोर कर ही देती है, साथ ही हमें शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचाती है। मद्यपान, धूम्रपान के कारण हमारा अच्छा भला स्वास्थ्य भी बिगड़ जाता है, इसके साथ ही सामाजिक प्रतिष्ठा को भी धक्का लगता है। आजकल पान-पाउच का भारी प्रसार-प्रचलन हो गया है। अधिकांश लोग-बच्चे से बूढ़े तक इसके शिकार है। आजकल लड़कियां व महिलाएं भी इसका शौक फरमाती है। यह बहुत बुरी लत है, इससे स्वयं को तथा पारिवारिक जनों को दूर रखें अन्यथा हम स्वयं जानलेवा बीमारियों को निमंत्रण देंगे।

व्यक्ति को स्वयं के साथ-साथ सामाजिक भी होना चाहिए। सार्वजनिक हित के कार्यों में रूचिपूर्वक कार्य करना चाहिए। जब भी हमारे पास अवकाश हो, हमें सार्वजनिक हित के कार्य अवश्य करने चाहिए। अपने रिश्तेदार के यहां सुख-दुःख में भागीदारी करनी चाहिए। हम संतुलित सोच और समझ के अनुरूप अपने-अपने कार्यों को यदि निष्ठापूर्वक सम्पन्न करते रहें तो निश्चय ही कामयाबी चूमेंगी, हमारे कदम। स्वास्थ्य, प्रसन्नता और कामयाबी की कुछ बुनियादी कुंजियां हैः – अच्छी गहरी नींद (न अधिक और न कम), पोषक भोजन समुचित मात्रा में करना, नियमित रूप से व्यायाम करना और खेलों में भाग लेना, कर्णप्रिय सुखद संगीत सुनना, ठहाके, लगाकर हंसना, बच्चों के साथ खेलना और स्वयं बच्चे ही बन जाना, किसी नशीले पदार्थ की लत न लगाना, बुनियादी मानव मूल्यों का सम्मान करना और प्रकृति के नियमों का पालन करना, उपयोगी और मन प्रसन्न करने वाले कार्य करना, योग, ध्यान, साधना और आध्यात्मिक उत्थान के लिए प्रार्थना करना। यदि आप लम्बा, उपयोगी, स्वस्थ व सफल जीवन जीना चाहते हैं तो उपर्युक्त नियमों का पालन करें।