मथुरा। मथुरा के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डाॅ. सालिगराम आर्य का आज उनके पैत्रृक जनपद शाहजहांपुर में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। वे बीते तीन दिन से अस्वस्थ्य चल रहे थे। उन्होंने अपने पीछे चार पुत्रों व चार पौत्र-पौत्रियों का भरापूरा परिवार छोड़ा है। देर शाम उनके पैत्रृक कस्बे मीरानपुर कटरा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह जानकारी उनके ज्येष्ठ पुत्र विजय कुमार आर्य ने दी है।
गौरतलब है कि डाॅ. आर्य को चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 1996 में उत्तर प्रदेश के होम्योपैथी विभाग के तत्कालीन निदेशक डाॅ. रामअवध सिंह द्वारा ‘हैनिमैन सम्मान’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने वर्ष 1986 से 1989 तक तीन वर्ष से अधिक समय तक ब्रज चिकित्सा संस्थान एवं उससे पूर्व लगभग इतने ही समय के लिए वृन्दावन के सहगल होम्योपैथिक धर्मार्थ चिकित्सालय में भी हजारों चिकित्सकों को गंभीर एवं असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाने का महती कार्य किया था।
वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने ब्रज की सांस्कृतिक गतिविधियों में विशिष्ट योगदान देते हुए प्रसिद्ध लोकनाट्य कलाकार पत्नी श्रीमती कमलेश लता आर्य के साथ पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया की अध्यक्षता में वर्ष 1977 में ‘ब्रज सारंग’ नामक संस्था का गठन किया था। जिसने ब्रज एवं कानपुरी शैली की नौटंकी का परिष्करण करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में हजारों प्रदर्शन किए तथा अनेक प्रतिष्ठापरक समारोहों में प्रदेश व ब्रज का प्रतिनिधित्व किया।
जिला होम्योपैथिक एसोसिएशन एवं अन्य अनेक गणमान्य नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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