वृंदावन। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीला स्थली वृंदावन धाम में आज आध्यात्म, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की गरिमामयी उपस्थिति में महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि महाराज के जीवन दीप आश्रम का विधिवत लोकार्पण किया गया।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. मोहन भागवत ने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का डटकर सामना करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जीवन के थपेड़ों से लड़ना है, हारना नहीं।” उन्होंने आश्रमों को धर्म और संस्कार की शिक्षा के केंद्र बताते हुए कहा कि ऐसे स्थान व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करते हैं, बल्कि उसे शारीरिक रूप से भी ऊर्जावान और तेजस्वी बनाते हैं।
विश्व में बढ़ते तनाव और संघर्षों पर चिंता व्यक्त करते हुए भागवत ने विशेष रूप से मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बदले की भावना से केवल विनाश होता है और मानवता को शांति एवं सौहार्द के मार्ग पर चलना चाहिए।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि “ब्रजभूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और त्याग की जीवंत अनुभूति है। यहां की धूल भी भक्तों के लिए चंदन समान है और सेवा ही सच्ची साधना है।” उन्होंने कहा कि जीवन दीप न्यास का यह प्रयास समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा और सहारा पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक दिनेश जी, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती, स्वामी धर्मदेव महाराज, योगी नवल गिरी महाराज, साध्वी ऋतंभरा, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य जन उपस्थित रहे।
ब्रज की इस पुण्य धरा पर सेवा और साधना का यह संगम समाज को नई दिशा देने वाला साबित होगा।
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