नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में टैक्सी और ऑटो चालकों ने 21 मई से तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। चालक संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और खर्चों के बीच वर्षों से किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। चालकों का दावा है कि वे अब भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने बताया कि दिल्ली में सिटी टैक्सी स्कीम लागू हुए करीब 15 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान किराया दरों में कोई संशोधन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि चालक कई बार सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने भी किराया संशोधन को लेकर आदेश जारी किया था। सरकार ने फाइल उपराज्यपाल के पास भेजने की बात कही थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया। ऐसे में चालकों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इस बीच ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, जिसे दिल्ली की विभिन्न ट्रांसपोर्ट यूनियनों का समर्थन मिला है। चालक संगठनों का कहना है कि टैक्सी और ऑटो चालक रोजाना 10 से 12 घंटे काम करने के बावजूद पर्याप्त आमदनी नहीं कर पा रहे हैं।
चालकों की मुख्य मांग है कि सरकार किराए की नई दरें तय करे ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने Ola, Uber और Rapido जैसी ऑनलाइन कैब सेवा कंपनियों पर भी नियमन लागू करने की मांग की है, ताकि वे तय किराया ढांचे का पालन करें। चालक संगठनों ने 18, 21, 22 और 23 मई को प्रस्तावित देशव्यापी ‘चक्का जाम’ आंदोलन को भी समर्थन देने की घोषणा की है। हड़ताल के चलते दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।