भीषण गर्मी की गिरफ्त में भारत

ग्लोबल वार्मिंग अब कोई दूर की आशंका नहीं बल्कि वर्तमान की कठोर सच्चाई बन चुकी है। भारत इस संकट की सबसे तेज मार झेल रहा है। हालिया तापमान आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारत का दबदबा खतरनाक संकेत दे रहा है। अप्रैल में ही कई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाना और कई जगह 45 डिग्री के करीब दर्ज होना सामान्य नहीं बल्कि चेतावनी है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। स्थिति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही बल्कि छोटे कस्बे भी लू और भीषण गर्मी की चपेट में आ चुके हैं। महाराष्ट्र तेलंगाना मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में गर्मी का असर व्यापक और गहरा है। देश का बड़ा हिस्सा हाई हीट रिस्क जोन में पहुंच चुका है जो आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत है।

शहरीकरण ने इस संकट को और बढ़ाया है। शहर कंक्रीट के जंगल में बदलते जा रहे हैं जहां गर्मी दिन में जमा होती है और रात में भी राहत नहीं मिलती। यही कारण है कि गर्म रातों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह बदलाव केवल मौसम का नहीं बल्कि जीवनशैली और विकास के मॉडल का परिणाम है। ग्लोबल वार्मिंग के पीछे मानव गतिविधियां सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी हैं। जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग जंगलों की कटाई अनियंत्रित औद्योगीकरण और बढ़ता प्रदूषण इस आग में घी का काम कर रहे हैं। परिवहन और शहरी विस्तार ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यह साफ है कि विकास की वर्तमान दिशा पर्यावरण के संतुलन को लगातार बिगाड़ रही है।

इसके प्रभाव केवल गर्मी तक सीमित नहीं हैं। अनियमित वर्षा सूखा बाढ़ समुद्र स्तर में वृद्धि और जैव विविधता का नुकसान इस संकट को बहुआयामी बना रहे हैं। इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य कृषि और जल संसाधनों पर पड़ रहा है जिससे यह समस्या एक व्यापक संकट का रूप ले चुकी है। अब समय चेतने का है। यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हालात और भी भयावह हो सकते हैं। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना वृक्षारोपण करना सार्वजनिक परिवहन अपनाना और संसाधनों का संयमित उपयोग करना केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं। भीषण गर्मी की गिरफ्त में भारतपर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। सामूहिक प्रयास ही इस संकट से निपटने का एकमात्र रास्ता है। आज लिया गया सही निर्णय ही कल को सुरक्षित बना सकता है।