सीवेज पम्प स्टेशन पर जेनरेटर न चलने से घाट किनारे की सड़क पर घण्टों भरा रहा नाली का पानी

नगर आयुक्त की फटकार लगते ही हुई कार्यवाही, परियोजना प्रबन्धक का किया स्पष्टीकरण तलब
मथुरा। यमुना प्रदूषण नियत्रंण ईकाई उ.प्र. जल निगम (ग्रामीण) के अधिकारियों के भ्रष्टाचार पूर्ण रवैय्या के कारण शुक्रवार को यमुना किनारे घाट की सड़कों पर कई घण्टे नालियों का पानी लबालब भर गया, जो कि ओवर फ्लो होने के पश्चात यमुना जी में गिरता रहा। आगरा होटल से विश्राम घाट की सड़क पर गंदा पानी भरा होने से स्थानीय नागरिकों के साथ यात्री और प्रतिदिन श्री द्वारिकाधीश मंदिर के जाने वाले लोगों को उसमें से गुजर कर जाना पड़ा जिससे उनकी भावनाओं को काफी ठेस पहुंची। इसकी जानकारी जब नगर आयुक्त अनुनय झा को लगी तो उन्होंने मौके पर वाटर वर्क्स के अवर अभियंता आशीष यादव को भेजा। जेई श्री यादव बंगालीघाट पम्पिंग स्टेशन पहुंचे तो देखा कि वहां जल निकासी का बाल्व बंद था, इसके बारे में जब पूछा तो बताया कि विद्युत सप्लाई नही है, यह सुनकर उनका माथा ठनक गया। उन्होंने वहां मौजूद कर्मियों से कहा कि जब यहां जेनरेटर मौजूद है तो क्यूं नही चला रहे। उन्होंने अपने सामने जेनरेटर चलवाकर तुरन्त बाल्व खुलवाकर गन्दे पानी की निकासी लक्ष्मीनगर सीवेज स्टेशन पर कराई। बाल्व खुलते ही कुछ समय में ही घाट किनारे सड़क से गन्दा पानी निकल गया।

इस सम्बन्ध में कार्यवाही करते हुए नगर आयुक्त अनुनय झा ने परियोजना प्रबंधक जल निगम का स्पष्टीकरण तलब करते हुए पूछा है कि सड़क पर सीवर का पानी ओवर फ्लो होने के लिए कौन जिम्मेदार है, जब पम्पिंग स्टेशन पर जेनरेटर उपलब्ध था तो क्यूं इस्तेमाल नही हुआ। पत्र में कहा गया है कि इस कृत्य से नगर निगम और उ.प्र. सरकार की छवि धूमिल हुई है। कठोर चेतावनी के साथ निर्देश दिए गये है कि भविष्य में इस कृत्य की पुनरावृत्ति न हो तथा स्वंय कार्यालय उपस्थित होकर दो दिन में लिखित स्पष्टीकरण उपलब्ध करायें।

सूत्रों का कहना है कि समूचे शहर में कुछ समय पहले जो सीवर लाइन डाली गई थी वो जल निगम द्वारा डाली गई थी। सीवेज पम्पिंग स्टेशन के संचालन की जिम्मेदारी निजी कम्पनी त्रिवेणी को दी गई है उसके कर्मचारी के बिजली चली जाने के पश्चात जेनरेटर का डीजल बचाने के चक्कर में पम्प को नही चलाते जिसके परिणाम स्वरूप सीवेज के पानी की निकासी नही हो पाती। जल निगम विभाग पूर्व में नगर विकास विभाग (नगर निगम) के अधीन था परन्तु अब ये विभाग जल शक्ति मंत्रालय में आता है जिस कारण नगर निगम के अधिकारियों का इस पर नियत्रंण समाप्त हो गया है।