कलयुग में भागवत कथा के श्रवण से होगा बेड़ा पार : पं विनोद दीक्षित

जनरल गंज में दीनदयाल बर्तन वालों के हुई भागवत कथा का समापन
मथुरा। कलयुग में भागवत कथा का श्रवण हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के लिए परम सौभाग्य की बात मानी जाती है। भागवत कथा में 7 दिन होने वाले आयोजन में भाग लेकर लोगों का जीवन धन्य हो जाता है वही कथा के आयोजक बड़े पुण्य के भागीदार बनते हैं। शहर के जनरल गंज स्थित आर्य समाज रेलवे क्रॉसिंग के समीप दीनदयाल बर्तन वालों ने 12 सितंबर से अपने आवास पर भागवत कथा का आयोजन कराया। भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजमान ज्योति नगर वाले पंडित विनोद दीक्षित ने श्रद्धालुओं को संपूर्ण भागवत जी के महत्व से बिंदुवार अवगत कराया। भागवत कथा सप्ताह में वाराह अवतार नरसिंह अवतार कपिल भगवान नंद उत्सव सुदामा चरित्र रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा में पंडित विनोद दीक्षित ने लोगों से कहा कि बच्चों को शिक्षित बनाएं और उन्हें अपने हिंदू संस्कृति से पूर्ण रूपेण परिचित कराएं ताकि जीवन में उनके उच्च विचार से समाज का भला हो सके। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है वे अपनी लीलाओं के माध्यम से मनुष्य और देवताओं के धर्मानुसार आचरण करने के लिए प्रेरित करते है। श्रीमदभागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण प्रेत योनी से मुक्ति मिलती है चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमदभागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य के सम्पूर्ण कलेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने अच्छे और बुरे कर्मों की परिणिति को विस्तार से समझाते हुए आत्मदेव के पुत्र धुंधकारी और गौमाता के पुत्र गोकरण के कर्मों के बारे में विस्तार से वृतांत समझाया और धुंधकारी द्वारा एकाग्रता पूर्ण भागवत कथा श्रवण से प्रेतयोनी से मुक्ति बताई।

उन्होंने कहा मनुष्य जब अच्छे कर्मों के लिए आगे बढ़ता है तो सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है और हमारे सारे कार्य सफल होते है ठीक उसी तरह बुरे कर्मों की राह के दौरान सम्पूर्ण बुरी शक्तियं हमारे साथ हो जाती है इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है छल और छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दूध हमेशा फटेगा। छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है- निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है छलछिद्र रहित और निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है। पहले दिन भगवान के विराट रूप का वर्णन किया गया। इसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भजन, गीत और संगीत पर श्रद्धालु प्रतिदिन अलग अलग प्रसंगो के दौरान झूमते रहे। भागवत कथा में अलग-अलग दिन हुए आयोजन के दौरान कृष्ण का रोल तनीशा ने रुक्मणी जी का कशिश ने सुदामा का गोपाल ने और वामन अवतार का रूप कृष्णा ने किया जिसकी सभी लोगों ने भूरी भूरी प्रशंसा की।
सोमवार को पूर्णाहुति के साथ भागवत कथा का समापन हुआ। भागवत कथा में दीनदयाल अग्रवाल अजय अग्रवाल गिर्राज अग्रवाल हीरा अग्रवाल कमला देवी अंजना वंदना कामिनी बुलबुल आदि ने व्यवस्थाएं संभाली।